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1993 मुंबई ब्लास्टः दाऊद के आदेश का पालन कर रहा था ताहिर

1993 मुंबई ब्लास्टः दाऊद के आदेश का पालन कर रहा था ताहिर

डिजिटल डेस्क, मुंबई। टाडा कोर्ट में बुधवार को 1993 बम धमाके के मामले में दोषी पाए गए मुजरिमों की सजा तय करने को लेकर बचाव पक्ष ने अपनी दलीलों की शुरुआत की। मंगलवार को अभियोजन पक्ष की बहस पूरी हो गई थी।

जज गोविंद सानप के सामने मामले में दोषी पाए गए मुजरिम ताहिर मर्चेंट उर्फ ताहिर टकल्या की ओर से पैरवी कर रहे वकील सुदीप पाचबोला ने कहा कि उनका मुवक्किल धमाके का मुख्य साजिशकर्ता नहीं है। ताहिर ने सिर्फ कुछ लोगों को पाकिस्तान भेजने का इंतजाम किया था। वह माफिया सरगना दाउद इब्राहिम गिरोह में कोई रुतबा नहीं रखता है। उसका इस गिरोह में कोई महत्वपूर्ण स्थान नहीं है। मर्चेंट ने सिर्फ उन आदेशों का पालन किया है, जो दाउद व अनिस इब्राहिम ने उसे दिए थे। ताहिर ने धमाके से पूर्व हुई किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। वह इस पूरे मामले में सिर्फ एक प्यादा था।

पाचबोला ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने कोई भी एेसा सबूत नहीं पेश किया है, जो यह दर्शाये कि ताहिर का विस्फोट की योजना पर कोई नियंत्रण था। इसलिए उसकी सजा को लेकर नरम रुख अपनाया जाए। गौरतलब है कि सीबीआई के विशेष वकील दीपक साल्वी ने मर्चेंट को धमाके का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। गौरतलब है कि 16 जून को टाडा कोर्ट ने मर्चेंट,अबू सलेम सहित 6 आरोपियों को धमाके के लिए दोषी ठहराया था। इस धमाके में 250 लोग मांगे गए थे, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे। धमाके में 27 करोड़ रुपए की संपत्ति नष्ट हुई थी।

सलेम का आवेदन खारिज

टाडा कोर्ट ने अबू सलेम के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें उसने खुद को दिल्ली पुलिस के सामने पेश करने का अनुरोध किया था। सलेम ने आवेदन में कहा था कि दिल्ली पुलिस उसे बराबर समन भेज रही है, लेकिन उसे वहां पेश नहीं किया जा रहा है। सलेम के मुताबिक उसके खिलाफ दिल्ली में भी मामले दर्ज हैं, लेकिन कोर्ट ने उसके आवेदन को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सलेम को कहा कि वे दिल्ली पुलिस को सूचित करे कि उसके खिलाफ मुंबई धमाके को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है, इसलिए मुंबई पुलिस के लिए यह संभव नहीं है कि वह उसे वहां पेश करें।

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