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8 वर्गों से जुड़े हैं 'महालक्ष्मी' के ये 8 मंत्र, प्रसन्न करने अपनाएं ये उपाय

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शुक्रवार मां लक्ष्मी का दिन माना गया है। इस दिन देवी लक्ष्मी की आराधना अतिशुभकारी बताई गई है। कहा जाता है कि इस दिन विधि-विधान से देवी लक्ष्मी के पूजन से सदैव ही घर में धन-धान्य का वास रहता है और परिवार में सपन्नता आती है। आज हम यहां आपको देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय बताने जा रहे हैं...


1. धन लक्ष्मी की उपासना के लिए सच्चे भाव से उनका स्मरण कर महालक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर पर कुंमकुंम, अक्षत, गंध, फूल चढ़ाकर अगरबत्ती लगाकर आस्था और पवित्र भाव से ध्यान करें। 

2. लक्ष्मी उपासना के लिए हो सके तो सादे-स्वच्छ श्वेत वस्त्र पहनें। इस उपासना के पूर्व पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।
 
3. देवी लक्ष्मी को कमल का पुष्प अतिप्रिय है अतः पूजन के कमल का पुष्प जरूर शामिल करें, ध्यान रखें कि यह खण्डित ना हो। 

4. धन लक्ष्मी का मंत्र धन और वैभव की सारी कामनाओं को पूरा करने वाला माना गया है। 

5. धन लक्ष्मी को सफेद पदार्थ जैसे चावल से बनी खीर और यथासंभव दूध से बने पकवानों का भोग लगाएं। 

शास्त्रों में ऐसा वर्णन आता है कि महालक्ष्मी के आठ रुप है। इन आठों स्वरूपों में मां जीवन के 8 अलग-अलग वर्गों से जुड़ी हैं। जाे जीवन में अावश्यक बताए गए हैं। अष्ट लक्ष्मी और उनके मूल बीज मंत्र इस प्रकार है-


1. श्री आदि लक्ष्मी - ये जीवन के प्रारंभ और आयु को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है - ॐ श्रीं।।
 
2. श्री धान्य लक्ष्मी - ये जीवन में धन और धान्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है - ॐ श्रीं क्लीं।।
 
3. श्री धैर्य लक्ष्मी - ये जीवन में आत्मबल और धैर्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।
 
4. श्री संतान लक्ष्मी - ये जीवन में परिवार और संतान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है - ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं।।
 
5. श्री गज लक्ष्मी - ये जीवन में स्वास्थ और बल को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।

6. श्री ऐश्वर्य लक्ष्मी - ये जीवन में प्रणय और भोग को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है - ॐ श्रीं श्रीं।।

7. श्री विद्या लक्ष्मी - ये जीवन में बुद्धि और ज्ञान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है - ॐ ऐं ॐ।।
 
8. श्री विजय लक्ष्मी यां वीर लक्ष्मी - ये जीवन में जीत और वर्चस्व को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है - ॐ क्लीं ॐ।।


 

 

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