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कुपोषण का दंश : महाकौशल-विंध्य के 12 जिलों में 18719 बच्चे अति कुपोषित

कुपोषण का दंश : महाकौशल-विंध्य के 12 जिलों में 18719 बच्चे अति कुपोषित

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। शिशु मृत्यु दर पर प्रभावी रोकथाम की सरकारी कोशिशों पर कुपोषण पानी फेर रहा है। हालात यह है कि जबलपुर समेत आसपास के 12 जिलों में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 15 हजार तथा कुपोषितों की संख्या पौने 2 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। जबकि इन जिलों में कुपोषण की रोकथाम के लिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि महिला को गर्भावस्था में पोषण आहार न मिलने तथा नवजात शिशु के खानपान में लापरवाही की वजह से प्रदेश में कुपोषण पर जीत नहीं मिल पा रही है। हालांकि सरकार गर्भवती महिलाओं की गोद भराई से लेकर प्रसूति तक की सुविधाएं उपलब्ध करा रही है।  

कटनी में सर्वाधिक अति कुपोषित 
कटनी में सर्वाधिक 2635 अति कुपोषित बच्चे चिन्हित किए गए हैं। जबलपुर संभाग के छिंदवाड़ा में 2474, दमोह 1780, मंडला 1371, डिंडौरी 1188, नरसिंहपुर 1501,  बालाघाट 1049 तथा सिवनी में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 1192 पहुंच चुकी है। शहडोल संभागीय मुख्यालय के अनूपपुर में तो कुपोषण से एक बच्चे की मौत तक हो चुकी है। अनूपपुर जिले में 1691, उमरिया में 1511 तथा संभागीय मुख्यालय शहडोल में अतिकुपोषित बच्चों का आंकड़ा 1682 है। कुपोषित बच्चों के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र सहारा बने हैं। इन 12 जिलों में संचालित 50 से अधिक केंद्रों  में कुपोषित बच्चों को भर्ती कर उपचार किया जाता है। जिलों में करीब 20 हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं जहां लाखों बच्चे दर्ज हैं।

जबलपुर में प्रयोग सफल रहा
जबलपुर जिले में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व समाजसेवियों ने 462 बच्चे गोद लिए थे। इन बच्चों के पोषण पर इन्होंने प्रतिमाह एक-एक हजार रुपए खर्च किया था। नतीजन इन कुपोषित 462 बच्चों का 500 ग्राम से डेढ़ किलो तक वजन बढ़ गया। जबलपुर जिले में कुपोषण पर काबू पाने का नतीजा आंकड़ों में भी दिखता है। जबलपुर जिले में जनवरी 2017 में 1965 बच्चे कुपोषित चिन्हित हुए थे। जुलाई माह में यह आंकड़ा घटकर 1480 रह गया। महिला एवं बाल विकास  विभाग की ज्वाइंट डायरेक्टर सीमा शर्मा का कहना है कि कुपोषण की रोकथाम के लिए शासन विभिन्न योजनाएं चला रहा हैं। संभाग में बीते वर्षों की तुलना में कुपोषण को लेकर जागरुकता आई है।

मृत्यु दर पर एक नजर
प्रदेश में 5 वर्ष से छोटे बच्चों की मृत्यु एवं एक वर्ष से छोटे बच्चों की शिशु मृत्यु दर के आंकड़े न सिर्फ चौंकाने वाले बल्कि राष्ट्रीय औसत से ज्यादा हैं। नवजात शिशु मृत्यु दर का राष्ट्रीय औसत 26 एवं प्रदेश में 35 है। शिशु मृत्यु दर का राष्ट्रीय औसत 39 जबकि प्रदेश में 52 है। पांच वर्ष से छोटे बच्चों की मृत्यु का राष्ट्रीय औसत 45 जबकि प्रदेश में 65 है।

कहां कितने कुपोषित ?
छिंदवाड़ा (30,000), मंडला (16207), डिण्डौरी (9325), नरसिंहपुर (18000), कटनी (24070), बालाघाट (24287), सिवनी (16835), शहडोल (21180), अनूपपुर (22734), उमरिया (2156), दमोह (3539)

इस तरह हो रहा खर्च
4 बार के फॉलोअप में हर बार 400 रुपए दिए जाते हैं । 
एक कुपोषित बच्चे को पोषित करने में 4 हजार रुपए से ज्यादा खर्च हो रहे हैं।
14 दिन तक बच्चे के उपचार के दौरान एनआरसी में साथ रहने वाली मां को 1780 रुपए मिलते हैं।

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