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काली कमाई के आरोप में फंसे रेल अफसर की याचिका खारिज, अब चलेगा मुकदमा

काली कमाई के आरोप में फंसे रेल अफसर की याचिका खारिज, अब चलेगा मुकदमा

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। काली कमाई के आरोप में रेलवे के अफसर के खिलाफ तय किए गए आरोपों को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। अफसर का दावा था कि अभियोजन की अनुमति राष्ट्रपति के बजाए रेल मंत्री ने दी है, लिहाजा उसके खिलाफ मुकदमा नहीं चल सकता। जस्टिस एसके सेठ और जस्टिस अंजुली पालो की डबल बेंच ने मामले में CBI की अदालत के फैसले को सही ठहराया। इस अहम फैसले में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि समाज में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार फैल रहा है और इस बारे में कोर्ट अपनी आंखें नहीं मूंद सकती।

यह मामला निशातपुरा भोपाल स्थित रेलवे वर्कशॉप के चीफ वर्कस मैनेजर राकेश बहल की ओर से दायर किया गया था। उस पर आरोप है कि जनवरी 2006 से दिसंबर 2012 के बीच उसने अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की। अन्वेषण के अभियुक्त के खिलाफ रेल मंत्री की मंजूरी के बाद रेल बोर्ड के डायरेक्टर द्वारा अभियोजन की अनुमति दी गई थी। इसके खिलाफ आवेदक ने CBI की विशेष अदालत में आवेदन देकर कहा था कि उसे नौकरी से हटाने के लिए सक्षम प्राधिकारी भारत के राष्ट्रपति हैं। उसके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति राष्ट्रपति द्वारा प्रदान नहीं की गई, लिहाजा रेल मंत्री की मंजूरी से दी गई अभियोजन की अनुमति निरस्त की जाए। यह आवेदन CBI कोर्ट द्वारा 2 जनवरी 2017 को खारिज किए जाने के खिलाफ यह पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी। मामले पर हुई सुनवाई के बाद डबल बेंच ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दी गई अभियोजन की अनुमति को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

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