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अवैध रूप से चल रही पैथोलॉजी लैब्स को हाईकोर्ट में चुनौती

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 13th, 2017 22:41 IST

अवैध रूप से चल रही पैथोलॉजी लैब्स को हाईकोर्ट में चुनौती

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। सागर जिले में अवैध रूप से पैथोलॉजी लैब्स के संचालन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के मुताबिक याचिकाकर्ता के सामाजिक सरोकार से संबंधित जानकारी न होने के मद्देनजर चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने मामले पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया।

यह जनहित याचिका सागर जिले के राहतगढ़ निवासी सत्येन्द्र जैन की ओर से दायर की गई थी। आवेदक का कहना था कि पूरे जिले में अवैध रूप से संचालित हो रहीं पैथोलॉजी संचालित हो रही हैं। उनमें न तो प्रशिक्षित टेक्नीशियन हैं और न ही पैथोलॉजिस्ट। इस बारे में दी गई शिकायत पर कार्रवाई तो हुई और उन पर ताले भी लगा दिए गए। इसके बाद उन लैबों का फिर से संचालन होने की शिकायत सीएम हैल्पलाईन में की गई। इसके बाद भी दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर यह याचिका दायर की गई।

याचिका में आरोप था कि राहतगढ़ में एक 30 बिस्तर का शासकीय अस्पताल तो है, लेकिन पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में क्षेत्र में वहां पर झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। इतना ही नहीं, क्षेत्र में अवैध पैथोलॉजी सेंटर भी संचालित हो रही। इन आधारों पर याचिकाकर्ता से कार्रवाई की राहत हाईकोर्ट से चाही थी।

सरकार द्वारा पेश किए गए जवाब का उल्लेख करके युगलपीठ ने कहा- ‘याचिकाकर्ता ने एक ठाकुर पैथोलॉजी को टारगेट करके यह याचिका दायर की है। उसकी शिकायत पर संबंधित पैथोलॉजी की जांच भी हुई और सब कुछ सही पाया गया। अब चूंकि याचिकाकर्ता ने अपने सामाजिक सरोकारों का ब्यौरा ही पेश नहीं किया, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के मुताबिक जरूरी है। और तो और याचिकाकर्ता द्वारा एक पैथोलॉजी के खिलाफ की गई शिकायत पर कार्रवाई भी हो चुकी, इसलिए मामले पर हस्तक्षेप नहीं किए जा सकते।’ इस मत के साथ युगलपीठ ने याचिका खारिज कर दी। राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता संजय द्विवेदी ने पैरवी की।

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