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पेंच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर उच्चस्तरीय बैठक, महाराष्ट्र ने की 4 टीएमसी पानी की मांग

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 07th, 2017 10:28 IST

पेंच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर उच्चस्तरीय बैठक, महाराष्ट्र ने की 4 टीएमसी पानी की मांग

डिजिटल डेस्क,छिंदवाड़ा। पेंच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है। महाराष्ट्र ने पानी के बंटवारे को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इधर, बारिश की कमी की वजह से तोतलाडोह डेम का भर पाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में अब मप्र के पेंच बांध (माचागोरा) के गेटों को खोलकर पानी मांगा जा रहा है। पेंच बांध से महाराष्ट्र सरकार 4 टीएमसी यानी 115 एमसीएम पानी मांग रही है। जबकि डेम में अभी सिर्फ 253 एमसीएम पानी जमा हो पाया है। 

दरअसल बुधवार को महाराष्ट्र से चीफ इंजीनियर चौहान के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय तकनीकी दल ने सिवनी आकर बैनगंगा कछार के चीफ इंजीनियर व अन्य तकनीकी अधिकारियों के दल के साथ बैठक की। महाराष्ट्र के दल ने पेंच बांध से पानी मांगा, जिस पर यहां के अधिकारियों ने फिलहाल असमर्थता जाहिर की है। हालही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के पास जल संसाधन विभाग आने के बाद महाराष्ट्र के जल संसाधन महकमे की सक्रियता और बढ़ गई है। माना जा रहा है कि पानी को लेकर मप्र पर दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर आरके श्रीवास्तव का कहना है कि अंतर्राज्यीय विषयों पर चर्चा के लिए महाराष्ट्र के अधिकारी आए हुए थे। बैठक सामान्य थी। यहां बारिश कम हुई है, डेम से पानी देने की स्थिति में हम नहीं हैं। जामघाट परियोजना के पुराने विषयों पर ही चर्चा हुई है।

महाराष्ट्र का पक्ष और तर्क
पेंच नदी के पानी का बंटवारा नए सिरे से होना चाहिए।
तर्क: पेंच नदी में यील्ड (पानी की आवक) 60 टीएमसी था। जो अब घटकर 43 टीएमसी हो गई है। यील्ड स्टडी कर दोबारा बंटवारा होना चाहिए।

जामघाट परियोजना को लेकर चर्चा कर कास्ट शेयरिंग पर सहमति बनाई जाए।
कन्हान नदी का पानी डायवर्ट कर टनल के जरिए तोतलाडोह डेम तक लाने पर सहमति बनाई जाए।
पेंच नदी पर माचागोरा बांध बनने से तोतलाडोह डेम नहीं भर पा रहा है। डेम का पानी छोड़ा जाए।

मध्यप्रदेश का पक्ष और तर्क
पेंच नदी के पानी का बंटवारा 1964 में हुआ था। कुल 60 टीएमसी पानी में से 35 मप्र और 25 टीएमसी महाराष्ट्र को मिलना है।
तर्क: पेंच बांध बनने से यील्ड कम नहीं हुई है। पानी कम होने की स्थिति में वर्ष 1968 के समझौते के अनुसार मप्र को 20 टीएमसी पानी लेना है। यहां 19 टीएमसी ही पानी लिया जा रहा है।

जामघाट परियोजना में जमीन मप्र की जा रही है। इसके बेनिफिट अनुसार और कास्ट शेयरिंग तय की जानी चाहिए।
कन्हान नदी का पानी टनल के जरिए तोतलाडोह तक ले जाने से यहां कोई फायदा नहीं होगा।
माचागोरा बांध में फिलहाल २५३ एमसीएम पानी है, जो यहां की जरूरत के लायक है। ऐसे में डेम का पानी नहीं दिया जा सकता।


कई बिंदुओं पर हुई चर्चा
इंटर स्टेट कंट्रोल बोर्ड की बैठक में किन-किन बिंदुओं को रखा जाना है।
बालाघाट के राजीव सागर बांध, बावनथड़ी को लेकर चर्चा।
पेंच नदी में पानी की हाइड्रोलॉजी की जाए, जिसकी दोनों राज्य शेयरिंग करें।
पेंच नदी पर माचागोरा बांध के अलावा अन्य ढेर सारे बांध बना लिए गए है। इसका मास्टर प्लान तैयार किया जाए। 


 

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