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बंद पड़ी ओपन कास्ट कोयला खदानों में होगा मछली पालन , मत्स्य विभाग की नीलक्रांति योजना

DainikBhaskarHindi.com | Last Modified - July 31st, 2017 19:15 IST

बंद पड़ी ओपन कास्ट कोयला खदानों में होगा मछली पालन , मत्स्य विभाग की नीलक्रांति योजना

डिजिटल डेस्क, अनूपपुर। मछली उत्पादन में जिले की आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए मत्स्य पालन विभाग द्वारा जिले में एक नई योजना प्रारंभ की जा रही है। इसके अंतर्गत जिले में बंद पड़े ओपन कास्ट खदानों में मछली पालन का कार्य किया जाएगा।

वर्षों से कोयला उत्पादन के बाद, यह खुली खदानें बेकार पड़ी हैं, जिसमें इस मॉनसून सीजन में संग्रहित जल पर्याप्त मात्रा में रहता है और इन्ही खदानों में मछली पालन के लिए मत्स्य विभाग के द्वारा नीलक्रांति योजना के तहत मछली पालन किया जाएगा, जिसका प्रस्ताव विभाग के द्वारा नेशनल Fisheries Development Board Hyderabad को भेजा गया है। अनुमति मिलते ही जिले में बंद कोयला खदानों में, यह योजना प्रारंभ कर दी जाएगी। अनूपपुर जिले के अंतर्गत SECL Company के अंतर्गत जमुना कोतमा और हसदेव क्षेत्र अंतर्गत लगभग 8 ओपन कास्ट खदानें बंद हो गई हैं। जिनमें मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं, जिसे जिला मत्स्य पालन विभाग ने इनका उपयोग मछली पालन करने की योजना के लिए  Fisheries Development Board Hyderabad को इसका प्रस्ताव भेजा है और जल्द ही इसकी अनुमति मिलने पर नीलक्रांति योजना अंतर्गत इसका कार्य शुरू कर दिया जाएगा। 

पंगेशियस मछली से बढ़ेगा उत्पादन

इन बंद पड़े खुली खदानों की गहराई काफी ज्यादा होने पर, यहां पंगेशियस मछली पालन के लिए अनुकूल परिस्थितियां होने के कारण, इस मछली का पालन किया जाएगा। बताया जाता है कि यह मछली काफी गहरे नदी में पाई जाती है और बंद खदानों की गहराई भी कम नहीं है। 

60 मिट्रिक टन बढ़ेगा उत्पादन 

बताया गया कि कालरी की इन बंद खदानों में नीलक्रांति योजना के तहत पंगेशियस मछली के उत्पादन से जिले में मछली पालन के लिए आत्मनिर्भरता बढ़ जाएगी और लगभग 60 मिट्रिक टन अतिरिक्त मछली पालन को यहां बढ़ावा मिलेगा। 

पहले से हैं 43 मत्स्य आखेट 

मछली पालन विभाग के द्वारा जिले में मछली पालन व उत्पादन के लिए अभी तक 43 जलाशयों में यह कार्य किया जाता था, जिसके अंतर्गत पुष्पराजगढ़ जनपद में 18, जैतहरी में 18, अनूपपुर में 5 और कोतमा के 2 जलाशय में मछली पालन होता था। लेकिन अब विभाग को 8 नए जलाशय मिलने से मछली पालन की क्षमता बढ़ेगी। 

 


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