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कांग्रेस के अहमद पटेल ने मारी बाजी, काम नहीं आई अमित शाह की रणनीति

कांग्रेस के अहमद पटेल ने मारी बाजी, काम नहीं आई अमित शाह की रणनीति

डिजिटल डेस्क, अहमदाबाद। गुजरात राज्यसभा चुनाव में तीन में से दो सीटें बीजेपी के खाते में गई हैं। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी राज्यसभा पहुंच गए हैं। पहले से ही लगभग तय मानी जा रही उनकी जीत के कयास सच हुए हैं। गुजरात से ही तीसरी राज्यसभा सीट में आखिरकार कांग्रेस के अहमद पटेल ने बीजेपी के बलवंत सिंह राजपूत को पटखनी देकर पांचवी बार राज्यसभा पहुंच गए हैं। बीजेपी ने इस सीट को अपने खाते में करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था, लेकिन अमित शाह की रणनीति कामयाब नहीं हो सकी। क्रास वोटिंग करने वाले दोनों विधायकों के वोट खारिज कराने में कांग्रेस कामयाब रही और पटेल की जीत तय हो सकी है। हालांकि बीजेपी इसको लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव और गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने अपनी जीत के बाद कहा कि मैंने अपने राजनीतिक करियर में इस तरह का चुनाव नहीं देखा। बीजेपी ने इसे एक अलग ही रंग दे दिया था, लेकिन कांग्रेस के विधायक आखिरी समय तक हमारे साथ डटे रहे और जीत पक्की हो सकी है। अब गुजरात का अगला 2017विधानसभा चुनाव भी कांग्रेस के खाते में जाएगा और हम बीजेपी को हराएंगे।  गौरतलब है कि कांग्रेस ने भी अपनी जीत के लिए 44 विधायकों को बेंगलुरु तक भेज दिया था। उसकी ये रणनीति काम आई और पार्टी क्रास वोटिंग करने वाले दो कांग्रेसी विधायकों के वोट चुनाव आयोग से खारिज कराने में भी कामयाब रही है।

देर रात तक चला हाइवोल्टेज ड्रामा

 मंगलवार को गुजरात की तीन राज्यसभा सीटों पर हुई वोटिंग के बाद देर रात तक एक सीट के पीछे हाइवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। वोटिंग होने के बाद कांग्रेस और बीजेपी के नेता इलेक्शन कमीशन पहुंच गए। वहां पर भी घंटो तक सियासी ड्रामा चलता रहा। आखिरकार देर रात EC ने कांग्रेस की बात मानते हुए दो बागी विधायक भोलाभाई गोहिल और राघव भाई पटेल के वोट को रद्द कर दिया। जिस पर बीजेपी ने आपत्ति जताई और फिर बीजेपी के विरोध के बावजूद वोटों की गिनती शुरु हो पाई। 2 वोट रद्द होने के बाद कांग्रेस के अहमद पटेल 44 वोटों के साथ 5वीं बार राज्यसभा में अपनी जगह पक्की करने में कामयाब हो गए। अहमद पटेल सिर्फ आधे वोट से अपनी सीट बचा पाए। उन्हें सिर्फ 0.48 वोट ज्यादा मिले हैं। अगर EC उन दो वोटों को रद्द नहीं करता तो अहमद पटेल ये चुनाव हार जाते। 

अहमद पटेल ने किया ट्विट- ''सत्यमेव जयते''

EC के एलान के बाद अहमद पटेल ने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्विट किया कि 'सत्यमेव जयते। मेरे सभी विधायकों का धन्यवाद। ये सत्ता और पॉवर का दम दिखाने वालों की हार है।' जीत के मीडिया से बातचीत में भी पटेल ने कहा कि उन्होंने हमें हराने की बहुत कोशिश की। ये हमारी पार्टी की एकजुटता का परिणाम है। इसका असर विधानसभा चुनाव मे दिखेगा। हम वहां भी पूरे दम से लड़ेंगे और उन्हें हराएंगे। 

EC के फैसले के खिलाफ कानूनी दरवाजा : सीएम

EC का फैसला आने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने कहा कि हम EC के फैसले के खिलाफ कानून का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि अहमद पटेल सिर्फ आधे वोट से जीते हैं। उन्हें 61 वोट मिलने चाहिए थे, लेकिन सिर्फ 44 वोट मिले। कांग्रस डूबती नाव है और विधानसभा चुनाव में और डूबेगी। 

ये लोकतंत्र की जीत : कांग्रेस 

गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने इलेक्शन कमीशन के इस फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया है। अहमद पटेल कीजीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा। वहीं रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि बीजेपी ने हमें हराने के लिए पूरी कोशिश की थी, लेकिन उसके बाद भी सच की जीत हुई। 

इसलिए रद्द हुए वोट 
कांग्रेस का आरोप था कि शंकर सिंह वाघेला गुट के दो विधायक राघवजी पटेल और भोलाभाई गोहिल ने वोट डालते वक्त बीजेपी एजेंट को दिखाया। इस पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और वोट कैंसल करने की मांग की।

ये है नियम 
 द कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स 1961 के नियम 39 के मुताबिक वोट देने के लिए पोलिंग स्टेशन पर गोपनीयता रखनी जरूरी है। अगर कोई इसका खयाल नहीं रखता है तो प्रिसाइडिंग या पोलिंग ऑफिसर उस वोटर से बैलेट पेपर वापस ले लेगा। 

इतने घंटे बाधित रही वोटिंग 

वोटिंग मंगलवार सुबह 9 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे के पहले ही खत्म हो गई। उनकी गिनती शाम 4 बजे से शुरू होनी थीए लेकिन कांग्रेस वोटिंग विवाद पर शाम 6रू30 बजे चुनाव आयोग पहुंच गई। इसके बाद काउंटिंग करीब 8 घंटे तक थमी रही। बाद में रात करीब 1रू30 बजे फिर से शुरू हुई।

नोटा के इस्तेमाल की खबर 

चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार राज्यसभा इलेक्शन में बैलेट पेपर में नोटा का इस्तेमाल हुआ। कांग्रेस इसे हटवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी,लेकिन कोर्ट ने इस नोटिफिकेशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

कांग्रेस को था डर 

कांग्रेस से 6 विधायकों के इस्तीफे के बाद पार्टी के पास 57 की जगह 51 विधायक बचे थे। फूट के बाद पार्टी को अपने 44 विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट करना पड़ा था।  चुनाव आयोग शिकायत और साक्ष्य होने पर रद्द भी कर सकता है।

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