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चार साल में 197 जानें चढ़ीं हादसों की भेंट, नशे के आदी बन रहे इनका शिकार

BhaskarHindi.com | Last Modified - August 04th, 2017 14:50 IST

चार साल में 197 जानें चढ़ीं हादसों की भेंट, नशे के आदी बन रहे इनका शिकार

डिजिटल डेस्क, उमरिया। जिले में बेकाबू रफ्तार और ओवडलोडिंग वाहनों के चलते हादसे बढ़ते जा रहे हैं। नेशनल हाईवे 78 के अलावा उमरिया में स्टेट हाईवे 11 रीवा मार्ग गुजरता है। दोनों में भारी तादात में ओवरलोड ट्रक बेकाबू रफ्तार से दौड़ते हैं। आए दिन NH 78, स्टेट हाइवे 11 पर युवा अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। इन हादसों का मुख्य कारण शराब का नशा, सीट बेल्ट नहीं लगाना भी है। इन्ही हादसों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस विशेष अभियान चलाने वाली है।

गौरतलब है कि औसतन हर महीने 5 लोगों की मौत हो जाती है। वहीं दुर्घटना में घायल एक शख्स रोजाना अस्पताल पहुंचता है। इस साल अभी तक 5 महीनों में कुल 171 लोग दुर्घटना का शिकार हुए हैं।  वहीं पिछले 4 सालों में यह आंकड़ा 909 पहुंच चुका है। इनमें मौत के 197 मामले भी शामिल हैं। अधिकांश मामलों में हादसे का कारण नशा व सुरक्षात्मक उपकरणों की अनेदखी करना लोगों को भारी पड़ा है।

4 साल 197 मौतें
सभी थानों में दुर्घटनाओं की सूचना पर प्राण घातक, गंभीर चोट, सामान्य व मृतकों का रिकार्ड मेंटनेंस होता है। साल 2014 से 2017 तक कुल 197 लोग हादसों में अपनी जान गवां चुके हैं। अभी तक कुल 909 लोगों की दुर्घटना में जान जाते-जाते बची। सबसे ज्यादा हादसे घुनघुटी, पाली, उमरिया व इंदवार थाना के अमरपुर इलाके में हुई हैं। पुलिस की मानें तो सबसे ज्यादा साल 2014 में हुए। इसके बाद हादसों में कमी आई, लेकिन लोग पुलिस से बचने के लिए हादसों का छिपाते हैं।

पुलिस की हाईवे पेट्रोलिंग पार्टी
NH 78 के अलावा उमरिया में स्टेट हाईवे 11 रीवा मार्ग गुजरता है। दोनों में भारी तादात में ओवरलोड ट्रक दौड़ते हैं। सड़क हादसों में कमी लाने के लिए पुलिस ने हाईवे पेट्रोलिंग पार्टी बनाई है। हर थाने में निरीक्षक रैंक का अफसर वाहन में अपने क्षेत्र को कवर करता है। नशे की रोकथाम के लिए यातायात पुलिस को 8 ब्रीथ एनालाइजर उपलब्ध कराया गया है। पिछले महीने विशेष अभियान में कुल 63 नशे में गाड़ी चलाते हुए लोगों पर जुर्माना लगाया। तीन चालकों के खिलाफ लाइसेंस निरस्ती के लिए प्रतिवेदन भेजा गया है।

पुलिस चलाएगी विशेष अभियान 
जिले में बढ़ते हादसों को कम करने पुलिस ने खुद मोर्चा संभालने की ठानी है। अब पुलिस गांव-गांव घूमकर खासकर मुख्य मार्ग व भारी वाहन वाले क्षेत्रों में जागरुकता अभियान के साथ बैठक करेगी। बस ऑपरेटर, छोटे बड़े वाहनों के चालकों को जागरुकता के लिए मोटिवेट किया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्य मार्ग किनारे आसानी से नशे की सामग्रियां उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा ज्यादातर इलाके में थाना पुलिस वास्तविक अभियान की बजाय रिकार्ड पूर्ति कर रहे हैं। इन्ही सब को देखते हुए पुलिस ने कमान संभालने की ठानी है।

जिला अस्पताल में ज्यादार गंभीर सड़क हादसे कवर करने वाले स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं डॉक्टर प्रमोद द्विवेदी ने बताया कि अधिकांश घटनाओं में चालक नशे की हालत में मिले हैं। दोपहिया में हेलमेट, बड़े वाहनों में सीट बेल्ट की कमी जान पर आफत साबित होती है। मौत के मामलों में तो सिर की चोट व हड्डी में ज्यादा शिकायतें आई हैं। वहीं एसपी डॉ. आसित यादव का कहना है कि बढ़ते सड़क हादसों में रोकथाम के लिए सेमिनार व जागरुकता अभियान शुरू करने का प्लान बनाया गया है। जल्द ही ऐसे क्षेत्रों में काम आरंभ होगा। लोगों को यातायात नियम की जानकारी, हेलमेट लगाने के लाभ के बारे में बताया जाएगा। इसके अलावा ट्रैफिक पार्क की कार्ययोजना है। 

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