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अमेरिका की बैंकों में छुपा भारतीयों का कालाधन FATCA के तहत आएगा वापस

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 07th, 2017 15:09 IST

अमेरिका की बैंकों में छुपा भारतीयों का कालाधन FATCA के तहत आएगा वापस

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत सरकार अब उन रईस लोगों को घेरने के की तैयारी कर रही है जो अमेरिका के बैंकों में खाते खोले बैठे हैं। इससे विदेशों में छुपा कालाधन जल्द देश में वापस आएगा। दरअसल भारत ये कदम अमेरिका फॉरेन अकाउंट टैक्स कंप्लायंस ऐक्ट (FATCA) के तहत उठा रहा है। जो सूचनाएं दे रहा है कि भारतीयों ने कितना पैसा वहां छुपा रखा है। सूचना के आधार पर टैक्स अथॉरिटीज ने एक्शन लेना शुरू कर दिया है। ऐसे लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिनके बैंक खाते अमेरिका में हैं। इससे विदेश में काला धन छिपाने के आरोपों में उन पर मुकदमे की राह बन सकती है। जिन लोगों को ऐसे नोटिस मिले हैं, उनमें एक मल्टीनैशनल के टॉप रैंक एग्जिक्यूटिव्स भी हैं, जो कुछ साल पहले भारत लौट आए थे। उनसे अमेरिकी बैंक खाते में उन्हें मिले डिविडेंड्स के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। 

अमेरिका में कुछ वित्तीय लेनदेन रखने वाले कई अन्य सीनियर एग्जिक्यूटिव्स को भी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इनकम टैक्स (इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इनवेस्टिगेशन) की ओर से लेटर मिले हैं। भारत ने FATCA पर दस्तखत करने के बाद सितंबर 2015 में अमेरिका से ऐसी ही इन्फॉरमेंशन मांगवानी शुरू की थी। अधिकारियों के मुताबिक, सवाल मुख्य तौर पर ऐसे लोगों के बैंक खातों में डिविडेंड्स, इंटरेस्ट इनकम और डिपॉजिट्स से जुड़े हैं, जिन्होंने अमेरिका में कुछ वक्त बिताया है। 

अगर एसेट्स और इनकम कुछ साल पहले की हों, लेकिन उनका खुलासा पिछले साल विदेश में रखी ब्लैक मनी को रेगुलराइज करने के लिए पेश की गई स्कीम के तहत नहीं किया गया होगा तो ऐसे लोगों को दिक्कत हो सकती है। सरकार ने विदेश में एसेट्स रखने वालों को इस स्कीम के तहत खुलासा करने का आखिरी मौका दिया था। अनडिसक्लोज्ड फॉरेन इनकम ऐंड एसेट्स (इंपोजिशन ऑफ टैक्स) ऐक्ट ने विदेश में संपत्ति छिपाने को अपराध घोषित किया था और ऐसे अपराध में 10 साल तक के सश्रम कारावास और 120 पर्सेंट टैक्स का प्रावधान है। इस तरह पूरी संपत्ति जब्त हो जाएगी। 

क्या है FATCA ?

FATCA को अमेरिका ने 2010 में लागू किया था। ये कदम हायरिंग इंसेंटिव्स टु रेस्टोर एंप्लॉयमेंट एक्ट के तहत उठाया गया था, ताकि अमेरिकी नागरिकों के विदेश में खाते खोलकर टैक्स चोरी की हरकत पर लगाम लगाई जा सके। इस अग्रीमेंट पर दस्तखत करने वाले देश अमेरिकी नागरिकों के उनके यहां किसी भी निवेश की जानकारी साझा करते हैं और यही काम अमेरिका उनके नागरिकों के बारे में करता है। 
 

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