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ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन में गड़बड़ी  

ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन में गड़बड़ी  

डिजिटल डेस्क, मुंबई।ओशो की उस वसीयत में फर्जी हस्ताक्षर होने का दावा हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में किया गया है । हाईकोर्ट में  उस याचिका में सीबीआई को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। अध्यात्मिक गुरू ओशो के ट्रस्ट में गड़बड़ी व निधि के कथित दुरूपयोग के आरोपी की जांच करने की मांग की गई है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए।  
पुणे निवासी योगेश ठक्कर ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन के ट्रस्टियों ने ओशो की वसीयत में फर्जी दस्तखत किए हैं। इस संबंध में उन्होंने ट्रस्टियों के खिलाफ 2013 में पुणे पुलिस में शिकायत की थी लेकिन अब तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है। इसलिए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए। ठक्कर ने कहा है कि अोशो(गुरू रजनीश) का निधन 1990 में हुआ था जबकि उनकी वसीयत 1989 में बनाई गई थी। 

मूल वसीयत फिलहाल उपलब्ध नहीं
न्यायमूर्ति आरवी मोरे व न्यायमूर्ति साधना जाधव की खंडपीठ ने याचिका में उल्लेखित तथ्यों पर गौर करने के बाद याचिकाकर्ता के वकील प्रदीप हवनूर को इस मामले में सीबीआई व केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि ओशो की मूल वसीयत फिलहाल उपलब्ध नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में हम पहले सीबीआई के पक्ष को भी सुनेंगे। यह कहते हुए खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 27 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। याचिका में लिखावट विशेषज्ञ से मिली रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि ओशो के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए है।

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