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पहाड़ करते हैं भगवान शिव का अभिषेक, जानिए गुप्त शिवलिंग का राज

BhaskarHindi.com | Last Modified - August 07th, 2017 17:45 IST

डिजिटल डेस्क, हटा। दमोह छतरपुर की सीमा पर चौरइयां के पास पहाड़ की तलहटी में बनी जोगीदंड की गुफा खोजी पर्याटकों का आर्कषक का केन्द्र बनती जा रही है। यहां तक पहुंचने का मार्ग दुर्लभ होने के बावजूद त्यौहारों पर बड़ी संख्या में भक्तों के आना जाना लगा रहता है। आस्था के इस केन्द्र को लेकर कई मान्यताएं भी जुड़ी हुई है। यहां पहाड़ों के अंदर बने शिवलिंग पर पहाड़ों से निरंतर बूंद-बूंद कर जलधारा भगवान शिव का अभिषेक करती है।

भौगोलिक स्थिति

जोगीदंड गुफा दमोह जिला की सीमा में स्थित है, लेकिन इस गुफा तक पहुंचने के लिए छतरपुर जिला के लुहरपुरा गांव से होकर जाना पड़ता है। इसी गांव से फिर नदी को पार करते हुए दमोह जिला की सीमा में आते है जहां यह गुफा है।

गाय के थन से गिरती है जलधारा

परिवहन संसाधनों से कोसों दूर जंगल के बीचों-बीच पहाड़ के नीचे बनी जोगीदंड गुफा के अन्दर जो शिवलिंग है, वह अद्वितीय है। गुफा के अंदर बना शिवलिंग के ऊपर पहाड़ की एक चट्टान ऐसी है, जो गाय के थन आकार ही है, इसी थन से सदैव हर पल प्राकृतिक जल की बूंद शिवलिंग पर गिरता रहता है। गुफा के अंदर के अनेक जगह जाने के रास्ते बने हुए है। लेकिन आज तक इस गुफा का कोई अंतिम छोर कोई पता नहीं लगा सका। पहुंचविहीन मार्ग पर होने के कारण यहां गिने चुने श्रद्धालु ही आते जाते है। गुफा के अंदर अनेक ऐतिहासिक अवोष होने का अनुमान भी लोग लगाते है।

नागा संत का है डेरा

सिद्धक्षेत्र जोगीदंड गुफा के पास नागा संत बाबा फलहारी का डेरा बना हुआ है। जो हर मौसम में यही रहते है। बाबा के द्वारा यहां जन सहयोग से समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते है। जिसमें भक्तों का आना जाना बना रहता है। बाबा ने बताया कि इस गुफा के अंदर शिवलिंग पर सदैव अमृतधारा बरसती है। यहां भगवान िव ने आकर आराधना की थी। इसके अंदर का रहस्य आज भी कोई पता नही लगा पाया है। गुफा में प्रवे के लिए दिन में भी टार्च या प्रका की व्यवस्था करनी पड़ती है। कई स्थानों पर लेटकर, झुककर एवं पानी में होकर भी निकलना पड़ता है। गुफा तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता न होने के कारण इस स्थान को कोई विष महत्व नहीं मिल रहा है।

भक्त कमले तंतुवाय, सुनील विवकर्मा, महेन्द्र, आलमसिंह, चौरईया के सरमन अहिरवार, कृपाल सिंह ने बताया गुफा में जहां शिवलिंग स्थापित है, वहां इतना पर्याप्त स्थान है कि 10 से 15 लोग पूजन अर्चन कर सकते है। गुफा में प्रतिदिन किसी का आना जाना न होने के कारण वहां जंगली पशु, पक्षी का डेरा बना रहता है।

शिव आराधना-साधना के लिए सर्वोत्तम स्थल-डॉ. दुबे

मुक्तिबोध सृजनपीठ सागर के निदेक एवं पूर्व कालेज प्राचार्य, साहित्यकार डॉ. श्यामसुंदर दुबे ने बताया कि जोगीदंड गुफा आराधना साधना के लिए बेहतरीन स्थल है। गुफा के अंदर स्थित शिवलिंग अति प्राचीन है, सभी लोग इस शिवलिंग तक नहीं पहुंच पाते है। गुफा के बाहर भी बैठने, अच्छा स्थान है। डॉ. दुबे ने कहा कि गुफा के अंदर प्रकृति को छेड़े बिना प्रका की व्यवस्था हो जाये, पहाड़ी के नीचे तक पहुंचने का रास्ता बन जाये तो दूर दूर से भक्त यहां आयेगें। माना जाता है कि कई साल पूर्व साधु संतों ने गुफा में इस शिवलिंग की स्थापना करके साधना की होगी। यही कारण है कि इस गुफा का शिवलिंग धार्मिक मान्यता के अनुसार बहुत महत्वपूर्ण है।

दोनों जिला के कलेक्टर बनायें यहां के विकास का मास्टर प्लान-समाजसेवी

समाजसेवी एवं पं. रामसुजान पाठक, पं. जय प्रका लुहरया, पं. श्रीराम कुरेरिया ने बताया कि इस स्थल के विकास का मास्टर प्लान दमोह एवं छतरपुर जिला के कलेक्टर संयुक्त रूप से बनाये तो यह स्थल चित्रकूट धाम जैसा विकसित हो सकता है, यहां भी पूरे दे से शिवभक्तों का आना प्रारंभ हो जायेगा। जन प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शासन प्रासन को भी मिलकर इस ओर सकारात्मक पहल करनी होगी।

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