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धड़क रहा दरगाहों का दिल, यहां पढ़ें कुदरत का करिश्मा

डिजिटल डेस्क, पांढुर्ना/छिंदवाड़ा। इसे अल्लाह का करम कहे या कुदरत का करिश्मा और यह किसी चमत्कार से कम भी नही। पांढुर्ना शहर में मौजूद मजारों और दरगाहों पर ऐसा चमत्कार देखने को मिल रहा है मानों कि इन मजारों और दरगाहों का दिल धड़क रहा हो। दिल धड़कने के साथ-साथ ऐसा नजर आ रहा है कि यह मजारें और दरगाहें सांसें भी ले रही हो।

पांढुर्ना शहर की मजारों और दरगाहों पर हो रहे इस चमत्कार को देखने अकीदतमंदों की भीड़ भी उमड़ने लगी है। शहर के हनुमंती वार्ड के किल्ले पर स्थित हजरत बाबा चांद शाहवली रहेमत तुल्लाह अलैह की दरगाह पर यह चमत्कार बीते शुक्रवार से हो रहा है। शुक्रवार को तेज धड़कनें नजर आने के बाद धीरे-धीरे यह धड़कनें कम होती जा रही है। कुछ ऐसा ही नजारा अकीदतमंदों ने नंदापुर की हजरत बाबा जंगली शाहपीर की दरगाह पर भी देखा है। इन दरगाहों के अलावा पांढुर्ना क्षेत्र और पांढुर्ना से सटे वरूड, अचलपुर क्षेत्र की अन्य मजारों और दरगाहों पर भी ऐसा चमत्कार होने की बातें सामने आ रही है।

दरगाह से जुड़े अमजद खान ने बताया कि दरगाहों का धड़कना किसी चमत्कार से कम नही है। ऐसा लग रहा है कि मजारों और दरगाहों पर जाने और ईबादत करने की आस्था कम होने के कारण मजारें और दरगाहें खुद अकीदतमंदों को अपनी ओर बुलाने यह चमत्कार दिखा रही हो। और ऐसा हो भी रहा है, मजारों और दरगाहों के धड़कने की बात सामने आने के बाद यहां लोग बड़ी संख्या में पहुंचने लगे है। अमजद बताते है कि पांढुर्ना में तीन बड़ी दरगाहों के अलावा कई छोटी मजारें है। हजरत बाबा गुन्चा शाहवली रहेमत अलैह की दरगाह पांढुर्ना की मुख्य दरगाह है, जो सभी दरगाहों की कुतुब मानी जाती है। हजरत बाबा चांद शाहवली रहेमत तुल्लाह अलैह की दरगाह ब्रिटीश काल के पूर्व से यहां मौजूद है। मुस्लिम समाज में शादियां होने पर यहां परिवार के लोग हल्दी, मेहंदी और चादर चढ़ाते है।

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