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'लालू एंड पार्टी' को बड़ा झटका, नीतीश के खिलाफ दायर याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

'लालू एंड पार्टी' को बड़ा झटका, नीतीश के खिलाफ दायर याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

डिजिटल डेस्क, पटना। पिछले दिनों बिहार में हुए राजनीतिक उलट फेर के बाद नवनियुक्त सीएम नीतीश सरकार के खिलाफ आज पटना हाई कोर्ट में फैसला सुनाया जाएगा। दरअसल सरकार के खिलाफ याचिका जेडीयू की पूर्व सहयोगी आरजेडी ने ही दायर की थी। इसमें नीतीश सरकार पर आरजेडी ने आपत्ति जताई  है कि जेडीयू ने छोटी पार्टी होने के बावजूद आनन-फानन में बीजेपी को साथ लेकर बिहार में सरकार बना ली थी।  पटना हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए 'लालू एंड पार्टी' की याचिका को खारिज कर दिया है। इससे आरजेडी के अरमानों पर न केवल पानी फिर गया है बल्कि उनकी सत्ता में वापसी की एक उम्मीद की किरण भी बुझ गई है।

दायर याचिका में विधानसभा में हुए हालिया बहुमत परीक्षण से जुड़े मसले पर सुनवाई होनी है। याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ करेगी। उसने दो अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने के लिए सोमवार 31 जुलाई की तारीख निर्धारित की थी।

दरअसल बीजेपी के समर्थन से बनी नीतीश सरकार ने 27 जुलाई को शपथ ली थी। जिस पर आरजेडी ने आपत्ती जताई थी और लगातार विरोध कर रही है। सरकार के गठन के खिलाफ कोर्ट में पहली याचिका बड़हरा के राष्ट्रीय जनता दल विधायक सरोज यादव ने दायर की थी, जबकि दूसरी याचिका नौबतपुर के समाजवादी नेता जितेन्द्र कुमार ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने राज्यपाल के फैसले पर कहा था कि सबसे ज्यादा विधायक आरजेडी के होने के कारण पहले आरजेडी को सरकार बनाने का न्योता दिया जाना चाहिए था। लेकिन नियमों को दरकिनार कर नीतीश कुमार को आमंत्रित किया गया। सरकार के गठन के खिलाफ आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके पुत्र तेजस्वी यादव ने भी कोर्ट में जाने की बात कही थी।

क्यों खारिज कर दी याचिका? 
पटना हाइकोर्ट ने लालू की इस याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि नई सरकार का गठन कॉन्स्टीट्यूशनल तरीके से हुआ है। इसके अलावा हाइकोर्ट ने ये भी कहा कि विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हो चुका है, जिसे नीतीश ने पास कर लिया था। 

याचिका में क्या मांग की गई थी? 
RJD की तरफ से हाइकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में हाल ही में हुए नई सरकार के गठन को लेकर चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि चुनावों में नीतीश कुमार और महागठबंधन को BJP को खिलाफ जनादेश मिला था, लेकिन नीतीश ने बीच में ही गठबंधन को तोड़ दिया। इस कारण राज्य में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते RJD को सरकार बनाने के लिए इनवाइट करना था, लेकिन गवर्नर ने ऐसा नहीं किया। इसलिए नई सरकार अन-कॉन्स्टीट्यूशनल है। 

कब हुआ था फ्लोर टेस्ट? 
बिहार विधानसभा में 28 जुलाई को फ्लोर टेस्ट किया गया था। जिसमें नीतीश और BJP के सपोर्ट में 131 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष को सिर्फ 108 वोट ही मिले थे। आपको बता दें कि राज्य में 243 विधानसभा सीट है और बहुमत के लिए 122 सीट की जरुरत है। फिलहाल विधानसभा में JDU के 71 और BJP के 53 विधायक हैं। इसके अलावा उन्हें कई और पार्टियों का सपोर्ट भी है। 

क्या हुआ था बिहार में? 
बिहार सरकार में डिप्टी सीएम और लालू के बेटे तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। लेकिन उसके बाद भी तेजस्वी ने इस्तीफा नहीं दिया। ऐसे में नीतीश कुमार की इमेज को नुकसान पहुंच रहा था, जिससे नाराज होकर 26 जुलाई को देर शाम नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। इसके कुछ देर बाद BJP ने नीतीश को समर्थन देने की बात की और देर रात तक BJP और JDU के विधायकों ने गवर्नर केशरीनाथ त्रिपाठी से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया और नीतीश को अपना नेता चुन लिया। जिसके बाद अगले ही दिन नीतीश ने सीएम पद की शपथ ले ली और उन्हीं के साथ BJP नेता सुशील मोदी ने भी डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली। ये सब इतनी जल्दी हो गया जिससे नाराज होकर लालू ने हाइकोर्ट जाने का फैसला लिया। 

  

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