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महाभारत के कुछ ऐसे श्राप जिनका प्रभाव आज भी दिखता है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत का जिक्र जब कभी भी होता है तो सामने बी आर चोपड़ा द्वारा की निर्मित और उनके पुत्र रवि चोपड़ा द्वारा निर्देशित धारावाहिक महाभारत दिमाग में घूमने लगता है। महाभारत हिन्दुओं का प्रमुख काव्य ग्रन्थ है जो हिन्दू धर्म ग्रंथों का समूह है। इन्हीं हिन्दू धर्म ग्रंथों में कई प्रकार के श्रापों का जिक्र है जिसमे कोई न कोई कारण छिपा हुआ था। कुछ श्राप में संसार की भलाई निहित थी तो कुछ में उनके पीछे छिपी कथाओं में महत्वपूर्ण भूमिका थी। इन्हीं में से आज हम आपको महाभारत के कुछ श्रापों को बताने जा रहें है जिसका प्रभाव आज भी देखा जाता है।

युधिस्ठिर ने दिया था सभी स्त्रियों को श्राप
महाभारत में जब युद्ध समाप्त हुआ तब माता कुंती ने पांडवों के पास जाकर बताया की कर्ण उनका भाई था। सभी पांडव इस बात को सुन कर दुखी हुए, युधिस्ठिर ने विधि विधान पूर्वक कर्ण का अंतिम संस्कार किया तथा शोकाकुल होकर माता कुंती के पास गए और उसी क्षण सभी स्त्री जाती को ये श्राप दिया कि आज से कोई भी स्त्री किसी भी प्रकार की गोपनीय बात का रहस्य नहीं छिपा पाएंगी।

श्री कृष्ण ने दिया था अश्वत्थामा को श्राप
महाभारत युद्ध में जब पांडव पुत्रों का अश्वत्थामा ने धोखे से वध कर दिया था तब सभी पांडवों समेत श्री कृष्ण भी अश्व्थामा का पीछा करते हुए महर्षि वेदव्यास के आश्रम जा पहुंचे। अपने प्राण को बचाने के लिए अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र से उन पर वार किया। और इधर अपने बचाव में अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया। उसी क्षण वेदव्यास जी ने दोनों अस्त्रों को टकराने से रोक लिया और अपने अपने अस्त्र वापस लेने को कहा। अर्जुन ने उस वक़्त अपने अस्त्र को वापस ले लिया किन्तु अश्वथामा अस्त्र वापस लेने की शिक्षा से वंचित था और उसने अस्त्र की दिशा बदलकर अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ की ओर कर दी। इस बात से क्रोधित होकर श्री कृष्ण ने अश्व्थामा को तीन हजार साल पृथ्वी पर भटकने का श्राप दिया और कहा कि तुम किसी भी जगह किसी भी मनुष्य से बात चीत नहीं कर पाओगे। तुम्हारे शरीर से लहू की गंध आएगी। इस वजह से तुम मनुष्य के बीच नहीं रह पाओगे।

जब श्रृंगी ऋषि ने दिया था परीक्षित को श्राप
परीक्षित अभिमन्यु के बेटे थे। पांडवों ने स्वर्ग जाने से पहले अपना सारा राज परीक्षित को दान दे दिया था। कहा जाता है की राजा परीक्षित के शासन में सभी प्रजा सुखी थी। एक बार राजा परीक्षित आखेट खेलने वन गए थे, जहाँ उन्हें एक शमिक नामक ऋषि मिले जो मौन धारण किये हुए थे। परीक्षित उनसे बात करने के लिए कई बार प्रयास किये लेकिन ऋषि का मौन होने के कारण वो गुस्से हो गए और उन्होंने ऋषि के गले में एक मरा हुआ सांप डाल दिया। जब इस बात का पता शमिक के पुत्र श्रृंगी को चला तो उन्होंने परीक्षित को श्राप दिया की आज से सात दिन बाद तक्षक नाग काटने से परीक्षित की मृत्यु होगी। कहा जाता था की परीक्षित के रहने से धरती पर कलयुग हावी नहीं हो सकता था इसलिए उनके मरते ही कलयुग पूरी पृथ्वी पर हावी हो गया।
 

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