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मुंबई बिल्डिंग हादसा : ग्रीन कॉरिडोर के चलते NDRF ने बचाईं दर्जनों जानें

मुंबई बिल्डिंग हादसा : ग्रीन कॉरिडोर के चलते NDRF ने बचाईं दर्जनों जानें

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भिंडी बाजार इलाके में गुरुवार को छह मंजिला हुसैनी इमारत के ढहने पर NDRF की टीम मलबे के नीचे दबे 47 लोगों की जान बचाने में सफल रही थी। हालांकि हादसे में 34 लोगों की मौत हो गई, लेकिन समय रहते अगर NDRF की टीम के लिए ग्रीन कॉरिडोर नहीं बनाया जाता, तो हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती थी। दक्षिण मुंबई का भिंडी बाजार NDRF की टीम के अंधेरी स्थित बेस से 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर है।

महाराष्ट्र NDRF के उप-कमांडेंट महेश नलावडे ने बताया कि उनकी टीम को 8 बजकर 40 मिनट पर बिल्डिंग के ढहने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही NDRF की टीम भिंडी बाजार के लिए रवाना हो गई। टीम को भारी ट्रैफिक के बीच भिंडी बाजार तक पहुंचना था। बचाव टीम जितनी जल्दी पहुंचती, बिल्डिंग के मलबे के नीचे फंसे लोगों को उतनी जल्दी बचाया जा सकता था।

ट्रैफिक की स्थिति देखते हुए, भिंडी बाजार तक की ये दूरी तय करने में 2 से 4 घंटे का समय लग सकता था। ऐसे में ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों से कहा गया कि भिंडी बाजार तक पहुंचने के लिए ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था चाहिए।

आमतौर पर ऐसे ग्रीन कॉरिडोर मेडिकल इमरजेंसी या महत्वपूर्ण मानव अंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए बनाए जाते हैं। नलावडे ने बताया, 'हम ट्रैफिक पुलिस के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंने 21 किमी लंबा ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिसकी वजह से हम लगभग 1 घंटे में 10 बजकर 30 मिनट पर हुसैनी बिल्डिंग के मलबे तक पहुंच गए, जिसके नीचे काफी लोग जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे थे। तेजी से लोगों को रेस्क्यू करना शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन अगले दिन लगभग 12 बजे पूरा हुआ।'

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