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'प्रोड्यूसर्स को मुनाफे की चिंता, बाल फिल्मों को मिलना चाहिए सब्सिडी'

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 11th, 2017 15:09 IST

'प्रोड्यूसर्स को मुनाफे की चिंता, बाल फिल्मों को मिलना चाहिए सब्सिडी'

डिजिटल डेस्क, नागपुर। आजकल के फिल्म निर्माताओं को मुनाफे की चिंता होती है। शायद यही कारण है कि फिल्मों में बाल कलाकारों के किरदार धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं। बाल फिल्मों को सब्सिडी मिलनी चाहिए, जिससे बच्चों के लिए फिल्में ज्यादा बन सकें। बॉलीवुड में काम करने वाले कलाकार काफी पेशेवर हैं, जो उनके जमाने में नहीं था। खुद को अनुशासित रखने का हुनर आज के कलाकारों में है। ये कहना है मास्टर राजू उर्फ फाहिम अजानी का। 

गौरतलब है कि मास्टर राजू उर्फ फाहिम अजानी का नागपुर से गहरा नाता है। मास्टर राजू नागपुर के हिंगणघाट से तालुक्क रखते हैं। उनकी ससुराल हिंगनघाट में है। फिल्म चितचोर के लिए उन्हें वर्ष 1976 में सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। मास्टर राजू को चितचोर, शर्त, परिचय, अमर प्रेम, अभिमान, किताब, अंखियों के झरोखे से, नालायक, खट्टा-मीठा जैसी फिल्मों से पहचान मिली। राजू सिर्फ 2 साल की उम्र से फिल्मों में काम कर रहे हैं। उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्मों और टीवी सीरियल में काम किया है।

मास्टर राजू ने बताया कि वे नागपुर आते रहते हैं। मौजूदा दौर की फिल्म मेकिंग और कलाकारों के बारे में उन्होंने कहा कि आज के दौर के कलाकारों में प्रोफेशनलिज्म है और ये अच्छी बात है। हालांकि इस दौर में स्पेशल इफेक्ट और कंप्यूटरीकरण के दौर में कहीं न कहीं आत्मा मर गई है। कहानी की कमी है, तो फैमिली ओरिएंटेंड कंटेट गायब हैं। पहले फिल्में फैमिली के लिए बनती थीं। अब युवाओं के लिए बनती हैं। ये फिल्में देखने में भव्य हैं, लेकिन इनमें आत्मा की कमी है। 

निर्माताओं को मुनाफे की चिंता
मास्टर राजू ने एक सवाल का जबाव देते हुए कहा कि हर फिल्म निर्माता 100 करोड़ कमाना चाहता है। ऐसे में बच्चों के लिए फिल्म कौन बनाएगा। बाल फिल्मों को बनाने के लिए सब्सिडी मिलनी चाहिए। बाल फिल्में कम बनती हैं क्योंकि हर किसी को मुनाफे की उम्मीद रहती है। मल्टीप्लेक्स में टिकटों की कीमत ज्यादा है, दर्शक कम हैं। ऐसे वक्त में बाल फिल्में चलना मुश्किल है। पहले हर फिल्म में बाल कलाकार होता था। अब ऐसा नहीं है। चीजें बदल रही हैं, लेकिन बेहतर भी हो रही हैं। बदलाव अच्छा भी है।

समय के साथ बदलाव जरूरी
टीवी में प्रसारित होने वाले कॉमेडी शोज के बारे में राजू ने बताया कि कॉमेडी शोज का बहुत रिपीटिटिव कंटेट है। जब मैंने टीवी शो शुरू किया, तो कई किरदार बेहतर मिले, वहीं नारद मुनि का रोल किया। इसके लिए खूब सराहना मिली। पर वैसे ही किरदार ऑफर होने लगे, तो बाद में मैंने उन्हें करने से मना कर दिया। आज भी टेलीविजन कर रहा हूं। कई पंजाबी और हिंदी मूवीज कर रहा हूं। वक्त के साथ बदलाव आता ही है। इसके साथ सभी को बदलना होता है।बतौर बाल कलाकार स्टारडम के बारे में राजू ने कहा कि तब उन्हें स्टारडम की समझ नहीं थी। जब राष्ट्रीय पुरस्कार लेते समय सभी उनका ऑटोग्राफ ले रहे थे और मिथुन चक्रवर्ती ने उनकी सराहना की, वो पल उनके लिए यादगार रहा।
 

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