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रैनसमवेयर का 4 देशों पर हमला, भारत के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट का काम थमा

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 27th, 2017 17:36 IST

रैनसमवेयर का 4 देशों पर हमला, भारत के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट का काम थमा

एजेंसी, लंदन/पेरिस। 'वानाक्राई-रेनसमवेयर' के करीब डेढ़ महीने बाद नए तरह के साइबर हमले से दुनिया भर में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। सॉफ्टवेयर को डैमेज करने वाले इस नए साइबर हमले में कंपनियों सहित सरकारों के साइबर ठिकानों और सर्वर्स को निशाना बनाया गया है, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान रूस, ब्रिटेन और यूक्रेन को होना बताया जा रहा है। 

भारत का सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट जेएनपीटी भी इस साइबर हमले का शिकार हो गया है। पोर्ट के एक टर्मिनल का संचालन इससे प्रभावित हुआ है। जेएनपीटी में हमले से प्रभावित एपी मोलर-माएस्क  गेटवे टर्मिनल इंडिया (जीटीआई) का संचालन करती है। इसकी क्षमता 1.8 मिलियन स्टैंडर्ड कंटेनर यूनिट को संभालने की है। जेएनपीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, हमें सूचना मिली है कि साइबर हमले के कारण सिस्टम डाउन होने से जीटीआई में संचालन थम गया है। वे मैन्युअली काम करने का प्रयास कर रहे हैं।

एजेंसी रिपोर्ट्स के मुताबिक़ युक्रेन के अधिकारियों ने देश के पॉवर ग्रिड, बैंकों एवं सरकारी दफ्तरों के कंप्यूटरों में भारी घुसपैठ की बात स्वीकारी है। रूस की रोसनेफ्ट तेल कंपनी ने भी हैकिंग का शिकार होने की खबर दी है। वहीं डेनमार्क की जहाजरानी कंपनी एपी मोलर-मएर्स्क ने भी ऐसी ही जानकारी दी। 

इसकी पुष्टि हो चुकी है कि हमला यूरोप से बाहर तक फैल चुका है। अमेरिकी दवा कंपनी मर्क ने कहा कि उसके कंप्यूटर सिस्टम भी हमले का शिकार हुए हैं।  खुफिया एजेंसियां इससे भारत सहित 150 देशों के प्रभावित होने की आशंका जता रही हैं। यूक्रेन के प्रधानमंत्री वोलोदमिर ग्रोएसमैन ने फेसबुक से साइबर हमले की जानकारी देते हुए कहा है कि इस हम प्रभावित नहीं हुए हैं। साइबर हमले की सबसे पहली शिकायत यूक्रेन के बैंकों से आई है। पिछले महीने भी कीव का मुख्य एयरपोर्ट और रूसी पेट्रोलियम कंपनी वानाक्राई वायरस से प्रभावित हुई थी।

वानाक्राई से ज्यादा खतरनाक
आईटी विशेषज्ञों ने इस वायरस की पहचान 'पेटव्रैप' के रूप में की है। माना जा रहा है कि यह वायरस पिछले साल सामने आए 'पेट्या रेनसमवेयर वायरस' का हाई वर्जन है। इससे हमलावर कंप्यूटरों को ठप कर फाइलों को लॉक कर, उसे अनलॉक करने के बदले पैसों की मांग करते हैं। यह हमला अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) से चोरी किए गए 'साइबर हथियारों' की मदद से अंजाम दिया गया है। व्हिसलब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन खुलकर इस संबंध में अमेरिका को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने भी कंप्यूटर सिस्टम में सुरक्षा से जुड़ी जानकारी रखने के सरकारों के तरीके की आलोचना की थी। 

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