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कम दाम में मिलेगा पौष्टिक आहार, आदिवासी अंचल में खुली रूरल न्यूट्री बेकरी

कम दाम में मिलेगा पौष्टिक आहार, आदिवासी अंचल में खुली रूरल न्यूट्री बेकरी

डिजिटल डेस्क,छिंदवाड़ा। अब भरपूर न्यूट्रीशियन वह भी कम से कम दामों में उपलब्ध होगा। इससे जहां पौष्टिक आहार उपलब्ध होगा वहीं आदिवासियों के भी रोजगार मिल सकेगा। कोदो-कुटकी और महुआ फ्लेवर के बिस्किट आदिवासी अंचल की उपज और उनकी पसंदीदा कोदो-कुटकी और महुआ के बिस्किट जिले में तैयार हो रहे हैं। तामिया के हर्षदिवारी गांव में रूरल न्यूट्री बेकरी स्थापित की गई है।

दरअसल आदिवासियों के बीच काम कर रही संस्था मप्र विज्ञान सभा ने विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग के सहयोग से बेकरी स्थापित की है। जो आदिवासियों की पसंद के अनुरूप उनके क्षेत्र की ही मुख्य कृषि व वनोपज से बिस्किट, टोस्ट व अन्य उत्पाद तैयार कर रही है। तामिया से करीब 14 किमी दूर कुआंबादला के पास हर्षदिवारी गांव में फिलहाल एक यूनिट का संचालन किया जा रहा है। जिसमें 70 से 80 किलो प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। 

सर्वे के बाद खुली बेकरी
मप्र विज्ञान सभा से जुड़े लोगों के मुताबिक संस्था ने क्षेत्र में आदिवासियों के बीच कुपोषण की स्थिति का सर्वे किया था। सर्वे रिपोर्ट सरकार के सामने प्रस्तुत की थी। इसके बाद रोजगार के साथ कुपोषण के लिए क्या काम किए जा सकते हैं। इसके प्रयोग के तौर पर रूरल न्यूट्री बेकरी की स्थापना की गई है। 

20 फीसदी कोदो-कुटकी, 80 फीसदी मैदा
रूरल न्यूट्री बेकरी में तैयार हो रहे बिस्किट व अन्य उत्पादों में मैदा या आटे का उपयोग 80 फीसदी किया जा रहा है। इसमें 20 फीसदी में कोदो-कुटकी, महुआ और आंवले का उपयोग किया जा रहा है। फ्लेवर के तौर पर कोदो, कुटकी, महुआ और आंवला मिक्स किया जा रहा है। 

जिले में कोदो, कुटकी का रकबा
जिले में कोदो व कुटकी का इस खरीफ सीजन में रकबा करीब 18 हजार हेक्टेयर है। इसमें सबसे ज्यादा उत्पादन जुन्नारदेव व तामिया क्षेत्र में होता है। तामिया में करीब 3 हजार हेक्टेयर में कोदो व कुटकी का उत्पादन होता है। औसत उत्पादन 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के करीब है। मप्र विज्ञान सभा प्रोजेक्ट इंचार्ज आरआर राही का कहना है कि भविष्य में रूरल न्यूट्री बेकरी को स्वसहायता समूहों से जोड़ने की प्लानिंग है। नाबार्ड और सीआईएई के जरिए समूहों को इससे जोड़ा जाएगा। ताकि हेंड होल्डिंग के जरिए समूह भी आत्मनिर्भर हो सकें। अभी हर्षदिवारी की बेकरी में 5 कर्मचारी और करीब 19 लोग उत्पादन बेचने के काम में लगे हुए हैं। 

क्या फायदे होंगे ?
क्षेत्र की कृषि उपज और वनोपज को प्रोत्साहन मिलेगा।
आदिवासी अंचल के लोगों के लिए रोजगार के लिए विकल्प।
दोनों प्रकार की उपज से तैयार बिस्किट सेहत के लिए अधिक फायदेमंद होंगे।
आदिवासी किसानों की परंपरागत उपज कोदो-कुटकी से घट रहे रुझान को बढ़ावा।
आदिवासियों तक सीमित उपज कोदो-कुटकी व महुआ को नया बाजार मिलेगा।
 

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