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आरडीयू के लिए खतरे की घंटी , पीएचडी कराना भी होगा मुश्किल

BhaskarHindi.com | Last Modified - September 11th, 2017 08:52 IST

आरडीयू के लिए खतरे की घंटी , पीएचडी कराना भी होगा मुश्किल

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने देशभर के विश्वविद्यालयों को अब 3 कैटेगरी में शामिल करने का फैसला लिया है। इनमें तीसरे नंबर में आने वाले विश्वविद्यालय न तो PHD कराने की पात्रता रखेंगे और न ही नए विभाग खोल सकेंगे। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि फिलहाल तो रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय इस पैमाने पर तीसरे नंबर की कैटेगरी में आ रहा है। अब 2019 में होने वाली नैक ग्रेडिंग के पहले वृहद स्तर पर सुधार और परफार्मेंस को बेहतर नहीं बनाया तो अनुदान में कटौती तो होगी ही, अन्य सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ सकता है। 

गौरतलब है कि कभी बेहतरीन शिक्षा के लिए फेमस रहे रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDU) के लिए यह बड़ी चेतावनी के साथ ही खतरे की घंटी भी मानी जा सकती है। UGC ने जो तीन रैंकिंग बनाई हैं, वे सरकारी के साथ ही ड्रीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों पर भी लागू होंगी। कैटेराइजेशन ऑफ यूनिवर्सिटी फॉर ग्रांट ऑफ क्रेडिट ऑटोनॉमी रेगुलेशन 2017 को मंजूरी दी जा चुकी है। यह कैटेगरी नैक की ओर से दी जाने वाली ग्रेडिंग और नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) की रैंकिंग के आधार पर तय होगी। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. कपिलदेव मिश्रा का कहना है कि धीरज रखिए। हम सतत् प्रयास में हैं कि इसे ए ग्रेड की यूनिवर्सिटी बनाया जाए। इसके लिए लगातार काम हो रहे हैं। प्रदेश में समय पर परीक्षाएं और सबसे पहले परिणाम RDU ने ही घोषित किए हैं। UGC ने शिक्षा, अनुसंधान, विस्तार और प्रशिक्षण ये चार मापदंड बनाए हैं, जिन पर हम लगातार काम कर रहे हैं। 2019 में की ग्रेडिंग में यह ए ग्रेड की यूनिवर्सिटी बनेगी। 

प्रदेश से पहली कैटेगरी में कोई नहीं 
प्रदेश की 10 में से एक भी यूनिवर्सिटी पहली कैटेगरी में नहीं है। दूसरी में 6 और तीसरी में RDU सहित कुल 4 यूनिवर्सिटी हैं। UGC की तीसरी कैटेगरी में आने वाली यूनिवर्सिटी न तो अपने यहां PHD करा सकेगी और न ही सेल्फ फाइनेंस का कोई नया विभाग खोल सकेगी। इस श्रेणी में आने वाले विश्वविद्यालयों की निगरानी खुद UGC करेगी, जिसकी मॉनिटरिंग कमेटी करेगी।

ग्रेड और स्कोर से तय होगी कैटेगरी 
पहली कैटेगरी में उन यूनिवर्सिटियों को रखा जाएगा, जिन्हें नैक से एक ग्रेड के साथ ही 3.5 या उससे ज्यादा स्कोर मिला है या फिर ऐसी यूनिवर्सिटी जो लगातार दो साल तक NIRF की रैंकिंग में पहले 50 में शामिल रही हो। दूसरी कैटेगरी में उन यूनिवर्सिटियों को शामिल किया गया है जिन्हें नैक से एक ग्रेड के साथ ही 3.01 से 3.49 तक स्कोर मिला हो या फिर जो लगातार दो साल तक NIRF की रैंकिंग में 51 से 100  के बीच रही हो। तीसरी में ऐसी यूनिवर्सिटी जिसे नैक से बी या सी ग्रेड मिला हो और जिसका स्कोर 3.00 से कम हो या जो  NIRF की रैंकिंग पहले 100 की सूची में शामिल न हो। 

RDU दौड़ में नहीं
इन तीन श्रेणियों में RDU तीसरे पायदान पर आता है। नवंबर 2014 को नैक की टीम ने यूनिवर्सिटी का निरीक्षण किया था तथा फरवरी 2015 को जो रिपोर्ट सौंपी, उसमें RDU को बी ग्रेड के साथ 2.68 स्कोर दिया गया। 4 साल के लिए होने वाली ग्रेडिंग अब 2019 में होगी, जिसमें बेहतर ग्रेड और स्कोर के लिए कड़े प्रयास करने की जरूरत है। 

दूसरी और तीसरी कैटेगरी में बंदिशें 
दूसरी श्रेणी की यूनिवर्सिटी को कोर्स आदि में पहली कैटेगरी के समान ही सुविधा रहेगी, लेकिन विदेशी यूनिवर्सिटी से टाइअप के लिए UGC से अनुमति लेनी होगी। निरीक्षण के मामले में भी यह छूट से वंचित रहेगी। तीसरी श्रेणी में आने वाली यूनिवर्सिटी से पीएचडी कराने का अधिकार भी छिन जाएगा, यहां वही पीएचडी कर सकेंगे जो नेट या स्लेट पास हों। इन्हें बड़ी ग्रांट मिलने में दिक्कत आएगी, साथ ही ये यूजीसी की मॉनीटरिंग में रहेंगी।

पहली कैटेगरी को मिलेंगे सभी अधिकार
UGC की पहली कैटेगरी में आने वाली यूनिवर्सिटी को नए कोर्स आदि शुरू करने के पूरे अधिकार होंगे। इस श्रेणी के संस्थान में यूजीसी सहित राज्य शासन या किसी एजेंसी को निरीक्षण का अधिकार नहीं होगा। इस श्रेणी की यूनिवर्सिटी को बिना यूजीसी की अनुमति के विदेशी यूनिवर्सिटी से अनुबंध करने का भी अधिकार होगा। 

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