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लंदन की अदालत में भारत का मजबूत पक्ष, जल्द कसेगा शिकंजा

BhaskarHindi.com | Last Modified - December 07th, 2017 14:49 IST

लंदन की अदालत में भारत का मजबूत पक्ष, जल्द कसेगा शिकंजा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली।  भारत ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण मामले में यूके फ्रॉड एक्ट 2006 के तहत कार्रवाई की मांग की है। सरकार की तरफ से आए आधिकारिक बयान में कहा गया है कि लंदन की अदालत में विजय माल्या के खिलाफ फ्रॉड का मजबूत मामला बनता है। विजय माल्या ने यूके एक्ट 2006 का उल्लंघन किया है। भारत ने अपना पक्ष मजबूती के साथ रखा है।

लंदन के कोर्ट में सुनवाई के दौरान माल्या की तरफ से पेश हुए गवाह ने कहा कि उन्होंने सारे बयान प्रेस रिपोर्ट के आधार पर दिए हैं। उनके पास कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं है। माल्या के वकील के पक्ष के बारे में अधिकारी ने बताया कि उनके तर्कों में काफी विसंगतियां थीं। जैसा कि उनके गवाह ने भी कहा कि सारे बयान मीडिया रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स के सुझाव के आधार पर दिए गए हैं न कि व्यक्तिगत जानकारी के अनुसार।

एक अधिकारी ने बताया, 'सीपीएस लॉयर मार्क समर ने शुरुआत में ही कहा था कि गलत जानकारी देकर कर्ज वापस न करने के इरादे से लोन लिया गया था। वकील ने भारत के हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सामने की गई गलतियों की भी बात कही।' उन्होंने कहा के सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की सुनवाई के दौरान माल्या के पास कोई जवाब नहीं था।

मालूम हो कि UK फ्रॉड एक्ट 2006 गलत जानकारी देने या जानकारी छुपाने वालों पर लागू होता है।  लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में भारत का पक्ष रख रही ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने  कहा था कि सरकार के मुताबिक, माल्या ने लोन हासिल करने के लिए धोखाधड़ी की।  माल्या पर 17 बैंकों के 9,432 करोड़ रुपए बकाया हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह पिछले साल 2 मार्च को देश छोड़कर भाग गया था। भारत ने ब्रिटेन से उसके एक्स्ट्राडीशन की रिक्वेस्ट की थी।

दो बार गिरफ्तार हो चुका है माल्या

लंदन एडमिनिस्ट्रेशन ने माल्या को  पहली बार रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 18 अप्रैल को गिरफ्तार किया था, लेकिन 3 घंटे में  ही माल्या को जमानत मिल गई थी। इसके बाद एक बार फिर 3 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग के दूसरे केस में माल्या को अरेस्ट किया गया था। लेकिन  इस बार भी आधे घंटे में ही बेल मिल गई।

गौरतलब है कि भारत ने इस साल 8 फरवरी को ब्रिटेन से उसके एक्स्ट्राडीशन  की रिक्वेस्ट की थी। इसके बाद मार्च में ब्रिटिश पीएम थेरेसा मे ने लंदन में अरुण जेटली से प्रोटोकॉल तोड़कर मुलाकात की थी। इस मुलाकात में माल्या को भारत को सौंपने पर चर्चा हुई थी। मार्च में ही यूके ने भारत को बताया था कि उसकी रिक्वेस्ट को फॉरेन मिनिस्ट्री ने सर्टिफाई कर दिया है।

 

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