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गले की फांस बन गई पदोन्नति, जवाब देने में आ रहा पसीना

BhaskarHindi.com | Last Modified - July 27th, 2017 15:42 IST

गले की फांस बन गई पदोन्नति, जवाब देने में आ रहा पसीना

डिजिटल डेस्क, उमरिया। जिले के आदिवासी विकास विभाग में बिना पद शिक्षकों की पदोन्नति करना अधिकारियों के गले की हड्डी बन गया है। एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत पदोन्नति की प्रक्रिया व स्वीकृत पदों आदि की जानकारी मांगी गई गई पर आजाक विभाग के अधिकारियों को जानकारी देने में पसीना आ रहा है। अब मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच गया है।

खास बात यह है कि प्रथम अपीलीय अधिकारी कलेक्टर के निर्णय के बाद आदिवासी विकास विभाग ने आरटीआई में जानकारी नहीं दी है। आरटीआई के तहत की गई अपील में तत्कालीन कलेक्टर केजी तिवारी ने अपने निर्णय में आदिवासी विकास विभाग के लोक सूचना अधिकारी सहायक आयुक्त को समस्त जानकारी आवेदक को निशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। कलेक्टर न्यायालय के निर्णय के ढाई साल बाद भी आदिवासी विकास विभाग ने जानकारी आवेदक को नहीं दी। बताया गया है कि तत्कालीन सहायक आयुक्त ने बिना पद सहायक शिक्षकों का उच्च श्रेणी शिक्षक के पद पर पदोन्नति कर ऐसी शालाओं में पदस्थापना कर दी थी जहां पद ही स्वीकृत नहीं हैं।

कलेक्टर ने यह दिया था निर्णय

कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार सहायक आदिवासी विकास उमरिया के कार्यालय में आरटीआई के तहत जानकारी चाही गई थी। शाहपुर संकुल की माध्यमिक शालाओं में स्वीकृत पदों का आदेश एवं पदोन्नति पर पदस्थ का आधार, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास का पत्र क्रमांक 901, दिनांक 7/8/2013 को जारी किया गया, जिसमें यूडीटी के रिक्त पदों का हवाला दिया गया है। पत्र क्रमांक 1595 दिनांक 5/11/2013 में प्रमुख सचिव आदिवासी विकास विभाग को यह कहना कि माध्यमिक शालाओं में पद स्वीकृति का आदेश नहीं है।

प्राचार्य शासकीय उमावि शाहपुर के पत्र क्रमांक 22 दिनांक 28/4/14 पर की गई कार्यवाही की प्रति। जारी पत्र क्रमांक 164 दिनांक 17/4/2008 का अवलोकन हो, जिसमें 17/4/2008 की स्थिति में माध्यमिक शाला खिचखिड़ी एवं हाईस्कूल चौरी में यूडीटी के कितने पद स्वीकृत थे, जिस पर पदोन्नति कर पदस्थ किया गया। यदि पद स्वीकृत नहीं थे तो पदोन्नति के आधार के अभिलेख। प्राचार्य शासकीय हासे स्कूल शाहपुर के पत्र क्रमांक 872 पर की गई कार्यवाही की प्रति।

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