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महिलाएं नहीं देखतीं भूतभावन महाकाल बाबा की 'भस्मारती'

DainikBhaskarHindi.com | Last Modified - August 09th, 2017 13:27 IST

डिजिटल डेस्क, उज्जैन। महाकाल बाबा उज्जैन के राजाधिराज कहे जाते हैं। यही वजह है कि हर त्योहार की शुरूआत बाबा के आंगन से ही होती है। महाकाल शिवलिंग स्वयं-भू है और ऐसी भी मान्यता है कि महाकाल हर वक्त यहां मौजूद रहते हैं। विशेष अवसराें पर जब भी बाबा की सवारी निकाली जाती है पूरा नगर उनके चरणों में नतमस्तक रहता है। ऐसी भी मान्यता है कि कभी भी महाकाल मंदिर के सामने से कोई घोड़े पर बैठकर नहीं निकलता, क्योंकि महाकाल यहां के राजा हैं। जिसने भी ऐसा प्रयास किया उसे भारी कष्टों का सामना करना पड़ा...

 

जगाने की व‌िध‌ि
इन्हीं भस्‍म से हर सुबह महाकाल की आरती होती है। दरअसल यह भस्‍म आरती महाकाल का श्रृंगार है और उन्हें जगाने की व‌िध‌ि है।

भूतभावन भगवान
ऐसी मान्यता है क‌ि वर्षों पहले श्मशान के भस्‍म से भूतभावन भगवान महाकाल की भस्‍म आरती होती थी लेक‌िन अब यह परंपरा खत्म हो चुकी है और अब कंडे के बने भस्‍म से आरती श्रृंगार क‌िया जा रहा है।

कपिला गाय के गोबर से बने कंडे
वर्तमान में महाकाल की भस्‍म आरती में कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलतास और बेर की लकड़‌ियों को जलाकर तैयार क‌िए गए भस्‍म का प्रयोग क‌िया जाता है।

मह‌िलाएं नहीं देख सकती
इस आरती का एक न‌ियम यह भी है क‌ि इसे मह‌िलाएं नहीं देख सकती हैं। इसल‌िए आरती के दौरान कुछ समय के ल‌िए मह‌िलाओं को घूंघट करना पड़ता है।

एक वस्‍त्र धोती
आरती के दौरान पुजारी एक वस्‍त्र धोती में होते हैं। इस आरती में अन्य वस्‍त्रों को धारण करने का न‌ियम नहीं है। महाकाल की आरती भस्‍म से होने के पीछे ऐसी मान्यता है क‌ि महाकाल श्मशान के साधक हैं और यही इनका श्रृंगार और आभूषण है।

 


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