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दुनिया के सबसे बुजुर्ग 113 वर्षीय क्रिस्तल का निधन, दोनों वर्ल्ड वॉर देखे थे

BhaskarHindi.com | Last Modified - August 11th, 2017 23:47 IST

दुनिया के सबसे बुजुर्ग 113 वर्षीय क्रिस्तल का निधन, दोनों वर्ल्ड वॉर देखे थे

डिजिटल डेस्क, येरुशलम। अब तक के दोनों World War देखने चुके दुनिया के सबसे बुजुर्ग इज़राइली होलोकॉस्ट सरवाइवर यसराइल क्रिस्तल का 113 साल की उम्र में निधन हो गया है। इजराइली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड बुक में क्रिस्तल के नाम सबसे बुजुर्ग आदमी होने का रिकार्ड भी दर्ज है। क्रिस्तल के आखिरी समय में उनका परिवार साथ नहीं था। 

पोलैंड में हुआ था जन्म

क्रिस्तल का जन्म राइट ब्रदर्स की पहली सफल हवाई जहाज उड़ान से तीन पहले 15 सितंबर 1903 को हुआ था। क्रिस्तल का जन्म मूलरूप से ज़ारनोव में हुआ था, जो अब पोलैंड है। दुनिया का सबसे बुजुर्ग यसराइल का अगले ही महीने में 15 सितंबर को 114 वां जन्मदिवस आने वाला था। लेकिन उससे पहले ही शुक्रवार को वो दुनिया को अलविदा कह गए। उनके परिवार में 2 बच्चे, 9 पोते-पोतियां और 32 परपोते-पोतियां हैं।

100 साल बाद निभाई 'बार मित्ज्वा' की प्रथा

क्रिस्तल ने यहूदियों में मनाई जाने वाली 'बार मित्ज्वा' प्रथा उम्र के 100 वें साल में सितंबर 2016 में मनाई थी। यह प्रथा यहूदियों में लड़कों के लिए 12 और लड़कियों के लिए 12-13 साल की उम्र में ही मना ली जाती है। क्रिस्तल को यह प्रथा 1916 में मनानी थी, लेकिन उससे तीन महीने पहले ही उसकी मां की मृत्यु हो गई थी, जबकि उसके पिता प्रथम विश्वयुद्ध में सैनिक थे। इस कारण क्रिस्तल यह 'बार मित्ज्वा' प्रथा उस समय नहीं मना पाए थे, जिसे 2016 में अपने 113वें जन्म दिवस पर मनाई थी।

नाजियों ने ढाए ज़ुल्म

उनकी बेटी शला कोपरस्टोच ने पिछले ही वर्ष एएफपी को बताया था कि पहले विश्वयुद्ध के बाद क्रिस्तल लॉड्ज़ चले गए, जहां उन्होंने परिवार की मिठाई की एक दुकान में काम किया। उन्होंने शादी की और उसके दो बच्चे भी हुए। उसके जीवन में परेशानियां तब आईं जब नाजियों ने शहर पर कब्जा किया और सभी यहूदियों को जबरन नाजियों का मौत का कैंप कहे जाने वाले औशविट्ज़-बर्कनाउ में भेज दिया।

इजराइल में नई जिंदगी शुरू की

यहां इस कैंप में और 1940 से 1945 के बीच 1.1 लाख लोग मारे गए थे। क्रिस्तल की किस्मत अच्छी थी कि वो बच गए। लेकिन इन सबके बीच क्रिस्तल का पूरा परिवार खत्म हो गया था। उनकी बीवी और बच्चे मारे गए। इसके बाद वे इजराइल चले गए, जहां उन्होंने दोबारा अपनी नई जिंदगी शुरू की और पुनर्विवाह कर मिठाई की दुकान खोल ली।

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