सिंगरौली नगर निगम को एनसीएल से वसूलना है 175 करोड़ , सुप्रीम कोर्ट में है मामला

सिंगरौली नगर निगम को एनसीएल से वसूलना है 175 करोड़ , सुप्रीम कोर्ट में है मामला

Bhaskar Hindi
Update: 2019-08-27 07:41 GMT
सिंगरौली नगर निगम को एनसीएल से वसूलना है 175 करोड़ , सुप्रीम कोर्ट में है मामला

डिजिटल डेस्क, सिंगरौली (वैढन)। नगर निगम सुप्रीम कोर्ट में एनसीएल से निर्यात कर का केस जीत जाता है, तो उसे पौने 2 अरब मिल जायेंगे। जिससे निगम क्षेत्र में विकास कार्यों के लिये पैसे की कमी आड़े नहीं आयेगी। नगर निगम प्रशासन ने क्षेत्र की सीमा के अंदर माल के विक्रय पर निर्यात कर लगाना शुरू किया था। जिसके तहत नगर निगम ने कोयला उत्पादन में एनसीएल पर निर्यात कर अधिरोपित कर दिया । इस निर्यात कर की राशि की गणना कर एनसीएल से टैक्स जमा करने का नोटिस भेजा गया था। एनसीएल प्रबंधन ने निगम के निर्यात कर जमा करने की नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में नगर निगम एनसीएल से केस जीत गया। जिस पर एनसीएल प्रबंधन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। मामला अभी भी चल रहा है, लेकिन जिस तरह से नगर निगम आयुक्त शिवेन्द्र सिंह इस मामले की पैरवी करा रहे है, उससे उम्मीद बंधी है कि जल्द ही फैसला हो जायेगा। निगम को भरोसा भी है कि वह हाईकोर्ट की तरह ही सुप्रीम कोर्ट से भी केस जीतेगा और उसकी माली हालत भी बेहतर हो जायेगी। यह मामला 2013 से पूर्व का है, क्योंकि उसके बाद निर्यात कर निकायों द्वारा वसूले जाने की व्यवस्था को सरकार ने समाप्त कर दिया है।

5 रूपये प्रतिटन लगाया था टैक्स

नगर निगम प्रशासन द्वारा नगरीय निकाय अधिनियम 1956 की धारा 132(6)की उप धारा 1(ढ) के अंतर्गत माल शब्द को परिभाषित कर एनसीएल के कोयला विक्रय पर 5 रूपये प्रतिटन की दर से निर्यात कर लगाया गया था। उसकी वसूली के लिए एनसीएल को नोटिस भेजी गई थीं लेकिन एनसीएल ने पैसा देने से इंकार कर दिया था। जिसके बाद मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने नगर निगम के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके बाद एनसीएल ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है। 

पूर्व में मिल चुके 21 करोड़ 

इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ही सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएल से नगर निगम को 21 करोड़ की अंडर प्रोटेस्ट राशि जमा करने के निर्देश दिए थे। जिस पर एनसीएल द्वारा निगम को 21 करोड़ रूपये दिये गये हैं। यह मामला यदि एनसीएल जीत जाता है तो नगर निगम को यह राशि एनसीएल को लौटानी भी पड़ेगी। इसलिये इस राशि का एफडीआर नगर निगम ने करा रखा है।

बड़े बजट की दरकार

बताया जाता है कि नगर निगम में विकास कार्यों के लिए बड़े बजट की आवश्यकता है, निगम के पास जितना ज्यादा पैसा आयेगा तो क्षेत्र के विकास को उतनी ही गति मिलेगी। निगम क्षेत्र में कई ऐसे बड़े सार्वजनिक कार्य करने है, जिससे निगम के सभी वार्डों में महानगरीय सुविधाएं मुहैया कराने में सहूलियत मिलेगी। बजट के लिए किसी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

कई प्रोजेक्ट अटके

नगर निगम में पैसे की कमी के कारण कई बडे प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं। बजट के अभाव में प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना अमृत की सीवर लाइन, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेयजल की पाइप लाइन, माजन मोड़ से नवजीवन विहार आरसीसी रोड का डामरीकरण समेत कई बड़े प्रोजेक्ट समय पर नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही निगम क्षेत्र में लोगों के लिए कार्पोरेट स्तर की सुविधाएं भी नहीं विकसित हो पा रही हैं।

इनका कहना है

निर्यात कर का केस जीतने पर नगर निगम को 175 करोड़ एनसीएल से मिलेंगे। इस राशि के मिलने से विकास कार्यों को और गति मिलेगी।
आरपी वैश्य, उपायुक्त नगर निगम

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