छत पर लटक कर बच्चों ने बचाई अपनी जान, एस्सार के राखड़ डैम के फूटने गांव पर बरपा कहर

छत पर लटक कर बच्चों ने बचाई अपनी जान, एस्सार के राखड़ डैम के फूटने गांव पर बरपा कहर

Bhaskar Hindi
Update: 2019-08-09 09:31 GMT
छत पर लटक कर बच्चों ने बचाई अपनी जान, एस्सार के राखड़ डैम के फूटने गांव पर बरपा कहर

डिजिटल डेस्क, सिंगरौली (वैढन)। एस्सार पावर प्लांट के पास गांव कर्सुआलाल में पिछली रात राखड़ का डेम फूटने से गांव पर कहर  बरपा । इसमें एक कच्चे घर में पांच बच्चे फंस गए थे जिन्होने छत पर लटक कर अपनी जान बचाई । इन बच्चों के माता-पिता किसानी के काम से पास के गांव खैराही गये हुये थे।

ये है घटना - बच्ची की जुबानी 

रात के करीब 8.30 बजे। कर्सुआलाल गांव की रहने वाली 11 वर्षीय सुंदरकली जायसवाल अपने बाकी भाई-बहनों के साथ झोपड़ीनुमा कच्चे घर पर थी और सभी मिलकर रोटियां बना रहे थे।  तभी अचानक से काफी जोर-जोर की आवाज आने लगी, ऐसा लगा जैसे काफी तेज तूफान आ रहा हो। यह सोच ही रहे थे कि अचानक नीचे से पानी जैसा कुछ बहते हुये आया और मेरे भाई-बहनों के साथ हम सभी लोग बहने लगे। रात के अंधेरे में कुछ पता ही नहीं चल पा रहा था कि हम पांचों में कौन कहां बहा जा रहा है। सभी लोग चिल्लाने लगे, बचाओ...बचाओ। ऐसा लग रहा था कि हम लोग अब बच नहीं पायेंगे। यह दर्द बयां की है ग्राम कर्सुआलाल की 11 वर्षीय सुंदरकली जायसवाल। जो उस रात गांव पर कहर बनकर टूटे एस्सार की बहती हुई राखड़ की चपेट में अपने भाई-बहनों के साथ आ गई थी और घंटों तक पांचों बच्चों की जान जोखिम में पड़ी रही। गुरूवार को रात के घटनाक्रम को बताते हुये सुंदरकली बताती है कि उसे जब छोटे भाई 5 वर्षीय गणेश के रोने की आवाज सुनाई दी तो वह उस तक पहुंचने की कोशिश की। लेकिन बहाव इतना तेज था और वह उस तक पहुंच नहीं पा रही थी। सभी लोग बहते-बहते अपने ही घर में फंस गये थे। फिर कुछ देर बाद ऐसा लगने लगा कि मैं किसी दलदल में फंसी जा रही हूं। बड़ी मुश्किल से मेरे कुछ भाई बहन मिले, तो हम लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़ लिये। सभी लोग काफी डर गये थे। कुछ तो घर की छत पकड़कर लटक गये थे बचने के लिये और बाकी दलदल में फंसे थे। 

ग्रामीण बने रक्षक

ग्राम कर्सुआलाल पर कहर बनकर टूटे एस्सार के राखड़ डैम के मड में पांच बच्चे फंसे हैं। इसकी भनक पहले ग्रामीणों को नहीं थी। क्योंकि बच्चों के माता-पिता उस दौरान मौके पर थे नहीं। जब वह लोग घटना की सूचना मिलने पर मौके पर भागे-भागे आये तो वह अपने बच्चों को ढूंढ़ने लगे। जिसके बाद बाकी ग्रामीण भी एक्टिव हुए और गांव के लोगों ने मिलकर एक-एक कर सभी पांचों बच्चों को करीब 2 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित बचा लिया। सुरक्षित बचाये गये बच्चों में अनुज जायसवाल उर्फ बाबा के 5 वर्षीय गणेश, 7 वर्षीय खुशबू, 9 वर्षीय गौरव, 11 वर्षीय सुंदरकली और 13 वर्षीय निर्मला शामिल हैं। 

रात के अंधेरे में गांव में मचा रहा हा-हाकार

रात करीब 8.30 बजे हुई इस घटना को लेकर ग्राम कर्सुआलाल में पूरी रात हाहाकार मचा रहा। घटना के करीब डेढ़-दो घंटे तक मौके पर प्रशासन की कोई मदद नहीं पहुंचने से लोग काफी भयभीत हो उठे थे कि क्या उनकी मदद करने कोई नहीं आयेगा? इन हालात में लोग आक्रोशित भी हो रहे थे और मदद की गुहार भी लगा रहे थे। देर रात करीब 11 बजे मौके पर कलेक्टर केवीएस चौधरी, एसपी अभिजीत रंजन, एसडीएम माड़ा विकास सिंह समेत अन्य आला अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। साथ में कई थानों के टीआई और अन्य पुलिस बल भी था।इस घटना में 5-6 घर नष्ट हो गये हैं और करीब एक दर्जन अन्य घर भी प्रभावित हुये हैं। फसलों आदि का भी काफी नुकसान हुआ है। एसडीएम विकास सिंह ने आश्वासन दिया कि सभी को मदद मिलेगी और उसी उम्मीद में गांव के लोग हैं। 

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