हाय ! दर्दनाक लपटें - सीएम बोले नहीं बख्शेंगे: अमरावती सरकारी अस्पताल के वेंटिलेटर में विस्फोट से धधका एसएनसीयू, 3 नवजातों की जलकर हुई मौत - 36 बाल-बाल बचे

अमरावती सरकारी अस्पताल के वेंटिलेटर में विस्फोट से धधका एसएनसीयू, 3 नवजातों की जलकर हुई मौत - 36 बाल-बाल बचे
  • वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद पूरे कक्ष में फैला धुआं-लपटें
  • आठ दिन में जांच रिपोर्ट, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
  • स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने दिए निर्देश
  • फायर ऑडिट की अवधि खत्म होने के बाद हुआ हादसा, न सायरन बजा न स्प्रिंकलर चला

Amravati News. जिला महिला सरकारी अस्पताल (डफरिन) की तीसरी मंजिल स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में सोमवार तड़के दर्दनाक हादसा हो गया। सुबह करीब 3.22 बजे शिलर वेंटिलेटर में अचानक आग लगने के बाद विस्फोट हुआ। देखते ही देखते धुआं और लपटें पूरे कक्ष में फैल गईं। हादसे की चपेट में आने से तीन नवजातों की मौत हो गई, जबकि यूनिट में भर्ती 36 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के समय एसएनसीयू में कुल 39 नवजात भर्ती थे।


फायर ऑडिट खत्म, फिर भी सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए दुरुस्त

हादसे ने अस्पताल की अग्निसुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार डफरिन अस्पताल के फायर ऑडिट की अवधि 21 अगस्त को ही समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।

आग लगने के बाद फायर सायरन तक नहीं बजा। इतना ही नहीं, छत पर लगा स्प्रिंकलर सिस्टम भी काम नहीं आया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने संवेदनशील नवजात शिशु कक्ष में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।


बताया जा रहा है कि फायर ऑडिट के नवीनीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग को जून में ही सूचना दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। यही लापरवाही अब तीन मासूमों की मौत के बाद जांच के घेरे में है।

वेंटिलेटर में आग के बाद मची अफरा-तफरी

वेंटिलेटर में आग लगने और विस्फोट के बाद एसएनसीयू में अफरा-तफरी मच गई। धुआं तेजी से फैलने के कारण नवजातों को सुरक्षित निकालना चुनौतीपूर्ण हो गया। अस्पताल के कर्मचारियों और अन्य संबंधित टीमों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया। 36 नवजातों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तीन बच्चों को नहीं बचाया जा सका।

हादसे के बाद अब शिलर वेंटिलेटर की तकनीकी स्थिति, उसके रखरखाव और आग लगने के वास्तविक कारण की भी जांच की जाएगी।

सात सदस्यीय समिति करेगी जांच, 8 दिन में रिपोर्ट

दोपहर करीब 2.15 बजे स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर अस्पताल पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने स्वास्थ्य आयुक्त संजय काटकर की अध्यक्षता में सात सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की। समिति में एम्स, आईएमए, अग्निसुरक्षा विशेषज्ञ और पत्रकार प्रतिनिधि शामिल होंगे।

समिति वेंटिलेटर, फायर सेफ्टी सिस्टम, फायर ऑडिट और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था समेत सभी पहलुओं की जांच करेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आठ दिन में जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


सीएम बोले- दोषियों को नहीं बख्शेंगे

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना को हृदयविदारक बताते हुए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। राज्य सरकार ने मृत तीन नवजातों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। घायल बच्चों का उपचार भी सरकारी खर्च पर कराया जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब फायर ऑडिट की अवधि खत्म हो चुकी थी और जून में नवीनीकरण की सूचना भी दी गई थी, तो उसके बाद भी अस्पताल की अग्निसुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त क्यों नहीं किया गया? जांच समिति की रिपोर्ट से इस गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है।

Created On :   24 Aug 2026 8:11 PM IST

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