Bhandara News: गोसीखुर्द के बैक वॉटर में पाल रहे थे प्रतिबंधित अफ्रीकन मांगुर मछलियां ,पुलिस ने मारा छापा

  • मत्स्य विभाग और कारधा पुलिस की कार्रवाई ं
  • आंध्रप्रदेश के मत्स्य व्यवसायी के खिलाफ ग्रामीणों ने की थी शिकायत

Bhandara News गोसीखुर्द बांध के बैकवॉटर के डूब क्षेत्र में प्रतिबंधित अफ्रीकन मांगुर मछलियों का अवैध पालन किए जाने के मामले में मत्स्य विभाग और कारधा पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए बड़े पैमाने पर मछलियां जब्त कर नष्ट कर दीं। यह कार्रवाई 25 जून को भंडारा तहसील के बोरगांव (बुज.) के जाख और खोलापुर क्षेत्र में की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई से स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश के कुछ मत्स्य व्यवसायी डूब क्षेत्र की जमीन पर तालाब बनाकर केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित अफ्रीकन मांगुर मछलियों का अवैध उत्पादन कर रहे थे। इसकी शिकायत ग्रामीणों द्वारा कारधा पुलिस थाने और मत्स्य विभाग को की गई थी।

शिकायत के बाद मत्स्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने संबंधित तालाबों पर छापेमारी की। छापे के दौरान तालाबों में बड़ी संख्या में प्रतिबंधित अफ्रीकन मांगुर मछलियां मिलीं। स्थानीय मछुआरों की सहायता से जाल डालकर सभी मछलियों को बाहर निकाला गया। इसके बाद जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदकर मछलियों को जमीन में दबाकर नष्ट कर दिया गया, ताकि उनका दोबारा उपयोग न हो और पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। प्रशासन ने संबंधित मत्स्य व्यवसायियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही भविष्य में इस तरह के अवैध मत्स्य पालन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

मृत जानवरों का मांस खिलाकर किया जा रहा था पालन : बोरगांव (बुज.) विवादमुक्त समिति के अध्यक्ष तुषार बावनकुले ने बताया कि आंध्र प्रदेश के कुछ व्यवसायी प्रतिबंधित मांगुर मछलियों के पालन के लिए मृत जानवरों का मांस वाहनों में भरकर लाते थे। गांव से गुजरते समय इन वाहनों से उठने वाली दुर्गंध के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। इसकी शिकायत कारधा पुलिस थाने में की गई थी, जिसके बाद मत्स्य विभाग को सूचना देकर संयुक्त कार्रवाई कराई गई।

कैंसर जैसी बीमारियों का रहता है खतरा : मांगुर और सरकारी बागुर जैसी मछलियों के पोषण के लिए मृत जीवों का मांस डाला जाता है। मछलियां यह मांस आसानी से खा जाती है। यह मछली खाने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए मत्स्य विभाग ने ऐसी मछलियों के बिक्री और पालन पर रोक लगाई है।



Created On :   27 Jun 2026 4:02 PM IST

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