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MP News: जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी बनाने की मंजूरी

भास्कर ब्यूरो, भोपाल। गुरूवार को कैबिनेट ने औद्योगिक विकास एवं निवेश के लिए जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ चयनित औद्योगिक एवं आर्थिक हब के इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट के लिए शासकीय स्वामित्व वाली विशेष कंपनी (एसपीवी) के गठन को मंजूरी दे दी। कंपनी पर राज्य शासन का स्वामित्व और नियंत्रण रहेगा। कंपनी को शासन द्वारा 100 करोड़ की प्रारंभिक चुकता पूंजी दी जाएगी। कंपनी के प्रभावी संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सामान्य निकाय गवर्निंग काउंसिल बनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री द्वारा नामित एवं नियुक्त उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सशक्त कार्यकारी निकाय के माध्यम से कंपनी के कार्यों का संचालन होगा। इकॉनॉमिक हब के तीव्र और सुव्यवस्थित विकास के उद्देश्य से विशेष कंपनी को भूमि की पहचान, भूमि प्रबंधन, भू-अर्जन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट, भू-आवंटन, लीज/सब-लीज, मोनेटाइजेशन तथा बुनियादी व सामाजिक अधोसंरचना के विकास के पॉवर रहेंगे। राज्य शासन की भूमि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से रियायती दर या निर्धारित शर्तों पर कंपनी को उपलब्ध कराई जाएगी। ज्ञात हो कि तीन सबसे बड़े आर्थिक, व्यापारिक और ज्ञान केंद्रों जबलपुर, भोपाल और इन्दौर जोड़ते हुए 'इंडस्ट्रियल कॉरीडोर के माध्यम से 7 प्रमुख जिलों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, सीहोर और देवास में विश्वस्तरीय आर्थिक और औद्योगिक संकुलों की स्थापना की जाएगी। इससे महाकौशल, मध्य क्षेत्र और मालवा अंचल में व्यापक आर्थिक बदलाव की उम्मीद है।
परियोजना में वन भूमि की आवश्यकता होने पर संबंधित केंद्रीय एवं राज्य कानूनों, पूर्वानुमोदन, क्षतिपूर्ति वनीकरण तथा एनपीवी सहित सभी वैधानिक शर्तों की पूर्ति के बाद ही भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंध अधिनियम, 2013 के अंतर्गत उपयुक्त इन्वेस्टमेंट रीजन एजेंसी के रूप में अधिकृत किया जाएगा। साथ ही मप्र ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के अंतर्गत विधि विभाग की सहमति से अधिसूचित इकॉनॉमिक हबों के लिए इसे नोडल एजेंसी की शक्तियां और दायित्व दिए जाएंगे। इसके कार्य क्षेत्र के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण इसके दायरे में नहीं होगा। कंपनी का संपूर्ण ध्यान आर्थिक हबों के भीतर आंतरिक एवं साझा अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों के संवर्धन पर ही केंद्रित रहेगा।
कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, सेक्टोरल पार्क जैसे फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी/आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आदि साझा सुविधाएं आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पीपीपी, ईपीसी, कन्सेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम तथा डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे विभिन्न वैधानिक मॉडलों का उपयोग किया जा सकेगा। इस निर्णय के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को परियोजना से जुड़े विभागों जैसे वित्त, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, वन तथा विधि विभाग से आवश्यक समन्वय कर अधिसूचनाएं, शासनादेश एवं अन्य वैधानिक दस्तावेज जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
सोयाबीन के लिए भावांतर योजना को स्वीकृति
कैबिनेट ने खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन के लिए भावांतर योजना को मंजूरी दे दी। यह योजना पीएम-आशा के तहत संचालित प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम (पीडीपीएस) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। भावांतर राशि का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी मंडी बोर्ड द्वारा किया जाएगा। जिसकी प्रतिपूर्ति सबसे पहले मंडी बोर्ड द्वारा संचालित मूल्य स्थिरीकरण कोष से होगी। कोष में राशि अपर्याप्त होने की स्थिति में राज्य शासन द्वारा मंडी बोर्ड को 1500 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट 1 वर्ष के लिए नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर जिलों में 24 नए पदों को मंजूरी दी गई। इनमें महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के लिए 24 नवीन पदों के सृजन व प्रतिस्थापन से 12 पदों की स्वीकृति दी है। भारत सरकार की योजनाएं समेकित बाल संरक्षण योजना और सक्षम आंगनवाड़ी व पोषण 2.0 अंतर्गत भारत सरकार की स्वीकृति अनुसार आउटसोर्स के आधार पर मानव संसाधन की भी स्वीकृति दी है।कैबिनेट ने जनजातीय कार्य विभाग के तहत संचालित 94 सांदीपनि स्कूलों के परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। जबकि सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसमें बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर की सिंचाई परियोजनाओं भी शामिल है।
विधि विभाग के लिए 15,557.35 करोड़ रुपये की स्वीकृति
कैबिनेट ने विधि विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की 16वें वित्त आयोग की अवधि 31 मार्च 2031 तक के लिए 15,557.35 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इसके तहत पंजीयक, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के अंतर्गत प्रशासनिक अधिकरण, न्यायालय में कम्प्यूटराइजेशन, विशेष न्यायालय से संबंधित योजनाओं सहित कुल 11 योजनाओं की निरंतरता के लिए 1,624.69 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई हैं। विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है। राज्य के समस्त अधीनस्थ न्यायालयों यथा जिला एवं सत्र न्यायालय, सिविल न्यायालयों आदि में पदस्थ न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के वेतन, भत्तों एवं कार्यालय व्ययों के देयकों के भुगतान आदि संबंधी योजनाओं के लिए 12,252.66 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है। न्यायालय भवनों के निर्माण से संबंधित योजनाओं के लिए 1,530 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है।
सूचना आयोग के लिए 71 करोड़ 81 लाख स्वीकृति
कैबिनेट ने राज्य सूचना आयोग की स्थापना और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण संबंधी योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि वित्तीय 2030-31 तक जारी रखने के लिए 71 करोड़ 81 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। कैबिनेट ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के निरंतर संचालन के लिए 1,697.62 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। इससे राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत स्वीकृत 7 आयुर्वेद महाविद्यालय एवं जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि से 1 आयुर्वेद महाविद्यालय का निर्माण डिण्डोरी में किया जा रहा है। आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय की अम्ब्रेला योजना की 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 31 मार्च, 2031 तक के लिए 3,535 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
भवनों के निर्माण और विस्तार के लिए 2,875.20 करोड़
कैबिनेट ने प्रदेश के शासकीय स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय, आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण और विस्तार से संबंधित योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन कुल 7122 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित है। योजना के क्रियान्वयन से शासकीय हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में शिक्षण कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय एवं कम्प्यूटर कक्ष, प्राचार्य, स्टॉफ रूम और कैंपस निर्माण के साथ-साथ शिक्षण कक्षों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर, ग्रीन बोर्ड, इंटरेक्टिव पैनल, एवं सुरक्षा के लिए कैमरे आदि की व्यवस्था होने से विद्यार्थियों को सुविधायें प्राप्त होगी।
सेवा संकल्प अभियान में 15 लाख 83 हजार को मिला लाभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट से पहले मंत्रियों से कहा कि सेवा संकल्प अभियान के दौरान 1 हजार 345 शिविर लगाए। इनमें 17 लाख 18 हजार से अधिक आवेदन मिले। 15 लाख 83 हजार आवेदकों को लाभ मिला है। सेवा ज्योति यात्रा में लगभग 1 हजार 600 यात्राएं निकालीं गईं। यात्राएं लगभग 15 हजार ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में निकाली गई। इनमें 11 लाख से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की। सेवा मेरा योगदान अंतर्गत कुल 11 प्रकार की सेवाओं में 50 लाख से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की।
Created On :   16 Oct 2026 11:50 PM IST












