Jabalpur News: किंग कोबरा की तलाश का अभियान छेड़ा, खुद हुए लापता

किंग कोबरा की तलाश का अभियान छेड़ा, खुद हुए लापता
7 से 8 महीनों बाद भी कोई रिजल्ट नहीं, अफसरों ने भी चुप्पी साधी

Jabalpur News: विलुप्त हो रही सांपों की एक विशेष प्रजाति किंग कोबरा के संरक्षण के प्रति प्रदेश सरकार ने विशेष रुचि दिखाई थी, करीब सात-आठ महीने पहले प्रदेश के कई जिलों के साथ जबलपुर में भी इसकी खोजबीन शुरू की गई थी। इसका जिम्मा वाइल्ड लाइफ से जुड़ी कुछ निजी व स्वयंसेवी संस्थाओं को सौंपा गया था, लेकिन अब तक इसका कोई रिजल्ट सामने नहीं आया है।

वन विभाग के अधिकारियों को भी इसके संबंध में कोई जानकारी नहीं है। किंग कोबरा नाम सुनते ही लोगों के मन-मस्तिष्क में एक भयानक सांप की छवि सामने आ जाती है। किंग कोबरा को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं भी हैं, खासकर भगवान शिव और उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल से जुड़ी कहानियों में इसका जिक्र आता है। शायद यही वजह है कि सरकार इनके संरक्षण को लेकर सजग है।

सांपों का रेस्क्यू करने वालों को मिलना था रोजगार

सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड स्तर पर दो स्नेक कैचर को रोजगार देने की योजना थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते योजना ठंडे बस्ते में चली गई। योजना के मुताबिक किंग कोबरा जैसे सांपों को संरक्षित करने की नीति बनाकर सर्पों के प्रति आमजन को जागरूक किया जाना था।

संरक्षण के लिए सर्प उद्यान भी बनाए जाने थे जो नहीं बने। दावा किया गया था कि प्रदेश में सर्प विशेषज्ञों का मास्टर ट्रेनर की तरह उपयोग कर उन्हें प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। वन विभाग द्वारा एनजीओ या किसी विशेष संस्था की सहायता से सर्प हितैषी के रूप में चिह्नित लोगों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, लेकिन सबकुछ फाइलों में दबकर रह गया।

पूर्व में देखा जा चुका है किंग कोबरा

सूत्रों के अनुसार किंग कोबरा करीब 15 वर्ष पूर्व नर्मदा नदी के तिलवाराघाट से लगे घाटों पर देखा जा चुका है। दरअसल पूर्व में गुजरात, आंध्रप्रदेश समेत अन्य राज्यों से सपेरे नागपंचमी के अवसर पर इन्हें लेकर जबलपुर तक आते थे और इनका प्रदर्शन करते थे लेकिन जब से सांपों को संरक्षित प्रजाति का दर्जा मिला, तब से इनके प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है।

Created On :   28 Jan 2026 4:48 PM IST

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