रायगड़ पालकमंत्री पद विवाद: कोकण विधान परिषद सीट बिनविरोध छोड़ने का निर्णय यूं ही नहीं लिया गया था - उदय सामंत

कोकण विधान परिषद सीट बिनविरोध छोड़ने का निर्णय यूं ही नहीं लिया गया था - उदय सामंत
  • तटकरे बोले सीएम और दोनों डीसीएम बैठकर चर्चा करेंगे
  • कोकण विधान परिषद सीट बिनविरोध छोड़ने का निर्णय यूं ही नहीं लिया गया था

Mumbai News. राज्य की महायुति सरकार में रायगड के पालकमंत्री पद को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। शिवसेना (शिंदे) नेता और उद्योग मंत्री उदय सामंत के तीखे बयान ने सहयोगी दल राकांपा (अजित) के बीच खींचतान को नई हवा दे दी है। सामंत ने स्पष्ट कहा कि कोकण विधान परिषद की सीट बिनविरोध छोड़ने के पीछे रायगड के पालकमंत्री पद को लेकर हुई राजनीतिक सहमति थी और अब उस वादे को भुलाकर पीछे हटना स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे पहले राकांपा (अजित) प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने रायगड के पालकमंत्री पद पर मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में चर्चा होने की बात कही थी।

क्या बोले उदय सामंत?

सामंत ने बिना नाम लिए अजित गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि महायुति के भीतर जो तय हुआ था, उसका पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोकण की विधान परिषद सीट बिनविरोध छोड़ने का निर्णय यूं ही नहीं लिया गया था। उस समय रायगड के पालकमंत्री पद को लेकर स्पष्ट चर्चा हुई थी। अब अगर कोई पीछे हटने की कोशिश करता है तो यह ठीक नहीं होगा। सामंत ने कहा कि हमारी इच्छा है कि हमारे मंत्री भरत गोगावले रायगड के पालकमंत्री बनें। सामंत के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि रायगड जिले में राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ को लेकर शिवसेना (शिंदे) और अजित गुट के बीच अंदरखाने प्रतिस्पर्धा लंबे समय से चल रही है। पालकमंत्री पद को लेकर दोनों पार्टियां अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत मानते हैं।

सामंत का बयान राकांपा (अजित) नेता सुनील तटकरे के उस बयान के बाद आया जिसमें तटकरे ने कहा था कि रायगड के पालकमंत्री के मुद्दे पर मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री बैठकर चर्चा करेंगे और बातचीत के जरिए रास्ता निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि महायुति में सभी दल मिलकर काम कर रहे हैं और किसी भी मुद्दे का समाधान आपसी सहमति से किया जाएगा। रायगड के पालकमंत्री को लेकर महायुति के घटक दलों के बीच पहले भी कई दौर की चर्चा हो चुकी है। हालांकि सार्वजनिक रूप से बयानबाजी शुरू होने से यह विवाद और ज्यादा खुलकर सामने आ गया है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है और महायुति के भीतर समन्वय की कमी का आरोप लगा रहा है। माना जा रहा है कि विधान परिषद चुनाव के बाद इस पर कोई फैसला हो सकता है।

Created On :   9 Jun 2026 10:03 PM IST

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