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शर्मनाक: जीटी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही, रेप पीड़िता को एक हफ्ते तक एमआरआई से वंचित रखा गया

Mumbai News. राज्य सरकार की ओर से संचालित गोकुलदास तेजपाल (जीटी) अस्पताल में एक 20 वर्षीय रेप पीड़िता के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार सामने आया है। जरूरी एमआरआई जांच के लिए पीड़िता को एक हफ्ते से अधिक समय तक इंतजार करवाया गया। सरकारी नियमों के अनुसार यौन हिंसा पीड़ितों को मुफ्त और तत्काल इलाज मिलना चाहिए। घटना के 10 दिन बाद बुधवार को पीड़िता का एमआरआई किया गया।
जानकारी अनुसार पीड़िता 5 अप्रैल को देर रात छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के पास बेहोशी की हालत में मिली थी। इसके बाद उसे सेंट जॉर्ज अस्पताल में भर्ती कराया गया। होश में आने के बाद उसने अपने साथ हुई यौन हिंसा की जानकारी दी। सेंट जॉर्ज अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी मेडिकल हिस्ट्री (मिर्गी की समस्या) को देखते हुए एमआरआई जांच की सिफारिश की और उसे जीटी अस्पताल रेफर कर दिया।
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डीन ने समय पर फैसला नहीं किया
जीटी अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग ने एमआरआई से पहले फीस भुगतान को लेकर आपत्ति जताई, जिससे जांच में देरी हुई। ऐसे मामलों में शुल्क माफ करने का अधिकार अस्पताल के डीन के पास है। लेकिन, डीन डॉ. जीतेंद्र देशमुख ने न तो फीस में छूट को मंजूरी दी और न ही कोई वैकल्पिक निर्देश जारी किए। सरकारी दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से कहते हैं कि रेप पीड़ितों की सभी जरूरी जांच और इलाज मुफ्त और बिना देरी के उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
मरीज को वापस सेंटजार्ज अस्पताल भेजा
जीटी अस्पताल की रेडियोलॉजी टीम ने मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुरूप स्कैन के दौरान एक एनेस्थेसियोलॉजिस्ट की मौजूदगी पर बल दिया। डीन की ओर से मंजूरी न मिलने के कारण यह प्रक्रिया अधर में लटकी रही। अंततः कोई समाधान नजर न आने पर मरीज को बिना किसी और उपचार के सेंट जॉर्ज अस्पताल वापस भेज दिया गया।
पीड़िता पर सहयोग न करने का आरोप
सेंट जॉर्ज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विनायक सावर्डेकर ने आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने बताया कि एनेस्थीसिया को लेकर पीड़िता सहयोग नहीं कर रही थी। इसलिए एमआरआई नहीं हो पाया था।
Created On :   15 April 2026 10:36 PM IST
