तारीख पर तारीख: रामझूला मर्सडीज हिट एंड रन केस में इंसाफ की लंबी रात, दो मौतें और न्याय की उम्मीद में तिल-तिल टूट रहा पीड़ित परिवार

रामझूला मर्सडीज हिट एंड रन केस में इंसाफ की लंबी रात, दो मौतें और न्याय की उम्मीद में तिल-तिल टूट रहा पीड़ित परिवार
  • सदमे से पिता की मौत, बिस्तर पर बीमार मां
  • बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने अगस्त 2024 में पुलिस जांच को दूषित करार दिया
  • कई बड़े लोगों ने समझौते का आफर दिया

Nagpur News. रामझूला मर्सडीज हिट एंड रन केस में इंसाफ की रात लंबी होती नजर आ रही है। दो मौतें होने के बावजूद पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में तिल-तिल टूट रहा है। 25 फरवरी 2024 की वह रात रामझूला फ्लाईओवर पर बाकी रातों जैसी ही थी। सड़क लगभग खाली थी। शहर नींद में था, लेकिन रात के करीब डेढ़ बजे कुछ ऐसा हुआ, जिसने दो परिवारों की दुनिया हमेशा के लिए उजाड़ दी। तेज रफ्तार दौड़ती एक मर्सिडीज ने पीछे से दुपहिया वाहन को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे। कुछ ही पलों में चीखें, टूटे कांच और सन्नाटा फैल चुका था।

उस बाइक पर सवार थे 34 वर्षीय मोहम्मद हुसेन गुलाम मुस्तफा और 32 वर्षीय मोहम्मद आतिफ मोहम्मद जिया। सफर आखरी साबित हुआ, दोनों की जिंदगी सड़क पर ही खत्म हो गई।


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कहा गया कि मर्सिडीज चला रही महिला रितिका उर्फ रितु मालू नशे में थी। लेकिन हादसे के बाद जो शुरू हुआ, वह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना की जांच नहीं थी। वह एक ऐसी लड़ाई थी, जिसमें एक तरफ पैसे और रसूख का आरोप था, तो दूसरी तरफ टूट चुके परिवारों की इंसाफ की पुकार।

नशे में धुत महिला रितिका उर्फ रितु मालू ने अपनी मर्सिडीज कार (एमएच-49/एएस-6111) से एक दुपहिया वाहन को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में मोहम्मद मोहम्मद आतिफ और मोहम्मद हुसैन ने दम तोड़ दिया।

सवा दो साल बाद भी न्याय नहीं

25 फरवरी 2024 की उस रात के बाद मोहम्मद हुसैन गुलाम मुस्तफा और मोहम्मद आतिफ मोहम्मद जिया का परिवार पूरी तरह बिखर गया। हुसैन अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। अब तक उसका परिवार सदमे में है। परिवार आज भी अदालतों, पुलिस दफ्तरों और जांच एजेंसियों के चक्कर काट रहा है। इस दौरान परिवार ने पुलिस की लापरवाही देखी। बार-बार अदालत के आदेश सुने। सीआईडी की चार्जशीट पढ़ी। बावजूद इसके न्यास अब भी उनसे कोसों दूर है। घटना के कुछ दिन बाद ही रितु मालू कानूनी दांवपेंच के जरिये जमानत पर रिहा हो गई। दूसरी तरफ परिवार इंसाफ का इंतजार करता रहा। आर्थिक तंगी के बावजूद वकील व कोर्ट की फीस के साथ रोजमर्रा का खर्च उठाते हुए परिवार आर्थिक रूप से बदहाल हो चुका है।


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पुलिस बनी विलेन?

आरोप है कि तत्कालीन तहसील पुलिस निरीक्षक संदीप विनायक बुवा और पीएसआई रहे परशुराम भवाल ने दुर्घटना के तुरंत बाद रितु मालू और उसकी दोस्त माधुरी सारडा को घटनास्थल से भागने दिया। टक्कर मारने वाली मर्सिडीज कार को बिना पूरी फॉरेंसिक जांच, पेंट चेकिंग या डैमेज रिपोर्ट के मात्र कुछ घंटों में आरोपी परिवार को लौटा दिया गया। हादसा रात 1:30 बजे हुआ, लेकिन रितु का ब्लड अल्कोहल टेस्ट 6 घंटे बाद लिया गया। तब भी रितु के ब्लड में 30 एमएल अल्कोहल मिला। शुरू में सिर्फ आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत बेलेवल धारा) लगाई गई, जबकि मामला शराब पीकर गाड़ी चलाने का था। बाद में मीडिया का दबाव पड़ने पर धारा 304 आइपीली लगाई गई। रितु मालू शहर के एक प्रभावशाली परिवार से है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने दबाव में आरोपी महिला को बचाने की कोशिश की है।

हादसे को 817 दिन बीत चुके हैं। पैसे का रसूख, पुलिस की लापरवाही और अब सीआईडी की लेटलतीफी उनके घाव तथा दर्द को कई बार कुरेद चुके हैं। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि कई बार बड़े रसूखदारों के जरिये केस सेटल करने का दवाब भी आया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अभी भी न्याय की उम्मीद में हैं।


पिता ने छोड़ी दुनिया

परिजनों के मुताबिक हुसैन घर का बड़ा बेटा था। उसकी मौत के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गया। हुसैन की बहन ने बताया कि बेटे की मौत से पिता सदमें से टूट गए थे। दो महीने पहले ही उनका निधन हो गया। मां पिछले 10 वर्षों से गंभीर बीमारी के कारण बिस्तर पर हैं। डायलिसिस पर उनकी जिंदगी गुजर रही है। परिवार में हम दो बहनें, छोटा भाई और जीजा आज भी न्याय की उम्मीद में कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा- जांच दूषित

मामले ने तूल पकड़ा, तो बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने अगस्त 2024 में पुलिस जांच को दूषित करार देते हुए पूरा मामला स्टेट सीआईडी को सौंप दिया। सीआईडी ने 24 दिसंबर 2024 को करीब 425 पत्रों की चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में कहा गया कि रितु मालू शराब के नशे में तेज रफ्तार से मर्सिडीज कार चला रही थी। सीआईडी ने आरोपी रितु पर आईपीसी की धारा 304, 201, 427 और मोटर व्हीकल एक्ट की गंभीर धाराएं लगाई। रितु के पति दिनेश मालू और माधुरी सारडा पर भी सबूत छिपाने तथा आरोपी को बचाने के आरोप लगाए गए। सीआईडी जांच में यह भी सामने आया कि मर्सडीज कार की बिना पूरी फॉरेंसिक जांच के आरोपी को सौंप दिया गया। कई अहम सबूतों के साथ लापरवाही बरती गई। अगस्त 2025 में अदालत ने दो पुलिस अधिकारियों समेत सात लोगों के खिलाफ अलग जांच के आदेश भी दिए। फिलहाल मामला जिला सत्र न्यायालय में लंबित है।


केस की टाइम लाइन

  • 25 फरवरी 2024 से मई 2026 तक क्या-क्या हुआ
  • 25 फरवरी 2024 : रितु मालू ने दो पहिया को टक्कर मारी। हादसे में मोहम्मद हुसैन और मोहम्मद आतिफ की मौत।
  • 25 फरवरी 2024 : तहसील पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 ए में केस दर्ज किया। कुछ घंटों में जमानत मिल गई।
  • 29 फरवरी 2024 फॉरेंसिक रिपोर्ट में रितु के ब्लड में अल्कोहल की पुष्टि। 2 मार्च 2024 दबाव बढ़ने पर आईपीसी 304 (मानव यथ) धारा जोड़ी गई।
  • 24 मई 2024 सेशंस कोर्ट ने मालू की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
  • 26 जून 2024 : बॉम्बे हाईकोर्ट ने रितु मालू की जमानत खारिज की।
  • 1-2 जुलाई 2024 : रितु मालू ने सरेंडर किया और गिरफ्तारी हुई।
  • 30 अगस्त 2024 हाईकोर्ट ने तहसील पुलिस की जांच को दूषित' मानते हुए केस सीआईडी को सौंपा।
  • 25 सितंबर 2024 : सीआईडी ने रितु मालू को दोबारा गिरफ्तार किया।
  • 24 दिसंबर 2024 सीआईडी ने 425 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। रितु मालू, दिनेश मालू और माधुये सारडा को आरोपी बनाया।
  • 9 अगस्त 2025: कोर्ट ने 2 पुलिस अधिकारियों समेत 7 लोगों के खिलाफ नई सीआईडी जांच के आदेश दिए।

मई 2026 तक केस अब भी नागपुर सेशंस कोर्ट में लंबित। ट्रायल जारी, अंतिम फैसला अब तक नाहीं।


Created On :   24 May 2026 5:58 PM IST

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