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Nagpur News: निर्मल उज्ज्वल सोसाइटी में पैसा निकालने मची होड़

- कुछ कर्मचारियों के इस्तीफा देने की चर्चा
- राशि के दुरुपयोग की सीबीआई जांच के बाद 7 दिन में 70 करोड़ निकाले
Nagpur News निर्मल उज्ज्वल को-ऑपरेटिव सोसाइटी में 1400 करोड़ रुपए से अधिक निवेश के दुरुपयोग के मामले में सीबीआई जांच के आदेश के बाद सोसाइटी और उससे जुड़े निर्मल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में हड़कंप मच गया है। बैंक से पिछले 7 दिनों में लगभग 70 करोड़ रुपए की निकासी हुई है। यह सिलसिला सोसाइटी और बैंक की कई शाखाओं में लगातार जारी है। सोसाइटी के दिवालिया होने की आशंका के चलते सदस्यों में अपना पैसा निकालने की होड़ मची है।
30 करोड़ की एफडी ब्रेक की : सूत्रों के अनुसार रुपए की भारी मांग के कारण सोसाइटी ने बैंक में जमा करीब 30 करोड़ रुपए की एफडी तोड़ दी है। पिछले 7 दिनों से पदाधिकारी लगातार सदस्यों के साथ बैठकें कर यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि स्थिति सामान्य है, लेकिन सदस्य मानने को तैयार नहीं हैं। उधर तेजी से कम होती राशि के चलते वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मार्केट स्टाफ पर अधिक से अधिक राशि जमा करवाने का दबाव बढ़ा दिया है। सीबीआई जांच के डर से कुछ कर्मचारियों ने इस्तीफे भी दे दिए हैं।
किसी भी समय दिवालिया हो सकती है : बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने हाल ही में निर्मल को-ऑपरेटिव सोसाइटी में करोड़ों की अनियमितताओं और रकम के दुरुपयोग के आरोपों पर सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने शिकायतों के आधार पर विशेष टीम से जांच करवाई थी। इस जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई थीं। इसके बाद उन्होंने 29 जून 2023 को केंद्रीय सहकारी सोसाइटी रजिस्ट्रार को भेजे पत्र में सोसाइटी प्रबंधन पर अवैध लेन-देन, नियम विरुद्ध निवेश और प्रशासनिक कदाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया कि 1400 से अधिक निवेशकों की राशि खतरे में है और बड़े पैमाने पर हेराफेरी की आशंका है। पत्र में यह भी कहा गया था कि सोसाइटी किसी भी समय दिवालिया हो सकती है। इसी पत्र के आधार पर हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की : कोर्ट - तत्कालीन पुलिस कमीश्नर अमितेश कुमार ने केंद्रीय सहकारी सोसाइटी रजिस्ट्रार से एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी और निवेशकों की रकम बचाने के लिए प्रबंधक नियुक्त करने का सुझाव दिया था। इसके जवाब में 19 सितंबर 2023 को केंद्रीय रजिस्ट्रार ने पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज करने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इसी दौरान नए पुलिस कमिश्नर डॉ. रवींद्र कुमार सिंगल ने कार्यभार संभाल लिया था। पत्र आने के बाद पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करने का रास्ता साफ हो गया था। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण एफआईआर दर्ज नहीं करने की चर्चा दबी जुबान हो रही है। इस पर हाई कोर्ट ने भी आश्चर्य जताते हुए सवाल उठाया कि कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कोर्ट ने इस पहलू को भी सीबीआई जांच के दायरे में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
Created On :   29 Nov 2025 4:13 PM IST















