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Nagpur News: राष्ट्रवादी और राष्ट्रीय का विवाद ठीक नहीं है- डॉ.भागवत

Nagpur News राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत ने कहा है कि नेशन और राष्ट्र में अंतर है। राष्ट्रवादी और राष्ट्रीय को लेकर विवाद ठीक नहीं है। दोनों का भावार्थ अलग है। उन्होंने कहा कि साहित्य में गलती के कारण विवाद बढ़ते हैं। लेखकों का दायित्व है कि अध्ययन के साथ अनुभव आधारित लेखन करें। शनिवार को रेशमबाग मैदान में राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव में सरसंघचालक संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा-समाज में काम करते समय कई लोग हमें राष्ट्रवादी कहते हैं। लेकिन हम कभी विवाद नहीं करते हैं। किसी विवाद में पड़ते भी नहीं है। राष्ट्र और नेशन में मूलभूत अंतर है। वाद, संघर्ष हमारे देश का स्वभाव है। परस्पर मैत्री, सहयोग व एकत्र चलने की संस्कृति है। राष्ट्र निर्माण में संघर्ष, आक्रामकता दिखती है। वर्चस्व भाव भी दिखता है। हमारा राष्ट्र प्राचीन काल से अस्तित्व में है। यह देश सत्ता, समीा रेखा व राजनीतिक व्यवस्था पर नहीं बल्कि संस्कार, एकता और परोपकार की भावना पर खड़ा है। नेशन की संकल्पना अंग्रेजों ने लादी है। हम भी वह शब्द इस्तेमाल करने लगे हैं।
राष्ट्र केवल नेशनलिज्म नहीं है। राष्ट्रत्व, राष्ट्रभाव है। पाश्चात्य नेशलिज्म से दो महायुद्ध हुए। उस नेशलिज्म में अत्यंत अहंकार था। लेकिन भारतीय राष्ट्र भाव एकता से जन्मा है। इसमें अहम नहीं है। भारत में वसुधैव कुटुंबकम व परोपकार का भाव है। धर्म,भाषा, आहार, परंपरा, प्रांत सहित विविध भेद के बावजूद भारतीय एकता में जुड़े हैं। हमारा राष्ट्र सत्ता निर्माण नहीं करता है। सत्ता निर्माण से पहले यह राष्ट्र अस्तित्व में आया। अनेक राज व्यवस्था आई और गई। राष्ट्रभाव कायम रहा। नेशन का भाषांतर राष्ट्र करें भी तो भावार्थ कायम रहता है। मैं राष्ट्रवादी , मैं राष्ट्रीय का विवाद निर्माण करना आवश्यक नहीं है।
सरसंघचालक ने आगे कहा-सफलता तत्कालिक आनंद देती है। काम में सार्थाकता जीवन में समाधान पैदा करती है। साहित्य में ज्ञान मिलता है। बोला हुआ सुनते हैं, लिखा हुआ पढ़ते हैं और जिया हुआ देखते हैं। जो लिखा है उसे साहित्य कहते हैं। साहित्य सृजनता लेखक का गुणधर्म है।
Created On :   29 Nov 2025 7:33 PM IST















