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सेमिनार: धार्मिक पुस्तकों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने का सुझाव, गुरु साहिब की सीख को व्यवहार में उतारने की जरूरत

डिजिटल डेस्क, नागपुर। गुरु नानक साहिब जी की शिक्षाओं को केवल गुरुद्वारों और धार्मिक आयोजनों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें समाज के व्यवहार में उतारने की जरूरत है। ‘गुरु नानक साहिब जी एंड द बिगिनिंग ऑफ ए न्यू सोसाइटी’ विषय पर आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने इन्हीं मुद्दों को केंद्र में रखते हुए समाज की वर्तमान परिस्थितियों पर मंथन किया। कार्यक्रम के संयोजक हरप्रीत सिंह ने कहा कि संगत में पढ़ने की रुचि बढ़ाने, सिखी आधारित अच्छे व्यक्तित्व का विकास करने और तथ्यों के आधार पर विचार साझा करने का साहस पैदा करने के उद्देश्य से गुरुद्वारा साहिब में पुस्तकालय स्थापित किए जाने चाहिए। सेमिनार के दौरान कहा गया कि इसका उद्देश्य केवल विचारों का आदान-प्रदान करना नहीं, बल्कि संगत को अध्ययन से जोड़ना भी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सामग्री भी रखी जाए
वक्ताओं ने सुझाव दिया कि गुरुद्वारा साहिब में ऐसी लाइब्रेरी विकसित की जाए, जहां संगत, विशेषकर बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न विषयों की उपयोगी एवं प्रमाणिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो। लाइब्रेरी में केवल धार्मिक पुस्तकें ही नहीं, बल्कि कक्षा 8वीं से आगे के विद्यार्थियों के लिए पाठ्य पुस्तकें व गाइड, 10वीं और 12वीं की अध्ययन सामग्री व प्रश्नपत्रों के समाधान, एमबीबीएस एवं उच्च शिक्षा से जुड़ी किताबें, UPSC, NEET, JEE सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सामग्री भी रखी जाए। इसके साथ ही सिख धर्म, गुरबाणी, सिख इतिहास और सिख विरासत से संबंधित प्रमाणिक पुस्तकों तथा प्रतिष्ठित सिख लेखकों और विद्वानों की रचनाओं को भी लाइब्रेरी का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
सेमिनार में आह्वान किया गया कि किताबों को केवल लाइब्रेरी की अलमारियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें संगत के जीवन का हिस्सा बनाया जाए। “पढ़ें, समझें, तथ्यों के आधार पर विचार करें और अपने विचार साझा करने का साहस करें” की भावना के साथ इस पहल को आगे बढ़ाने की अपील की गई।
‘सच’ बोलने वाले बहुत, ‘सच आचार’ अपनाने वाले कितने?
एडवोकेट मनमंदर सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पंक्ति “सचहु ओऱै सभु को, उपरि सचु आचारु॥” का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य बोलना जरूरी है, लेकिन उससे भी आगे सत्य को अपने आचरण में उतारना है। व्यक्ति के व्यवहार, लेन-देन और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी में ईमानदारी दिखाई दे, तभी इसका वास्तविक अर्थ सामने आता है।
गलत के खिलाफ आवाज उठाना भी जिम्मेदारी
डॉ. तेजिंदर सिंह ने कहा कि गुरु नानक साहिब जी ने अन्याय और अत्याचार के सामने चुप रहने का रास्ता नहीं चुना। उनकी शिक्षाएं हमें सच बोलने के साथ सही बात के लिए खड़े होने का साहस देती हैं। खासकर जब कोई कमजोर या पीड़ित हो, तब उसकी आवाज बनना समाज की जिम्मेदारी है।
नाम जपो… किरत करो… वंड छको—तीन सूत्र, पूरी जिंदगी की सीख
ग्लोरिया मुरियन ने गुरु नानक साहिब जी के तीन मूल सिद्धांतों—नाम जपो, किरत करो और वंड छको—को जीवन से जोड़कर समझाया। ईश्वर का स्मरण, ईमानदारी से मेहनत और अपनी कमाई, ज्ञान व खुशियों को दूसरों के साथ बांटना। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे काम और व्यवहार में भी नजर आनी चाहिए।
‘बाबर बाणी’ ने याद दिलाया—दूसरों का दर्द भी हमारा है
इंजीनियर गुरनीश सिंह ने ‘बाबर बाणी’ के संदर्भ में गुरु नानक साहिब जी की निर्भीक सोच पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरु साहिब ने अपने समय में निर्दोष लोगों पर हुए अत्याचार और उनके दर्द को आवाज दी। संदेश साफ है—समाज में किसी के साथ अन्याय हो रहा हो तो उससे आंखें फेर लेना समाधान नहीं है।
मदद ऐसी हो कि जरूरतमंद कल खुद दूसरों की मदद करे
डॉ. परगट सिंह ने सेमिनार में सबसे अहम सवाल उठाया—क्या हम सच में गुरु नानक साहिब जी की शिक्षाओं पर चल रहे हैं? उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई लोगों में हुनर और मेहनत की क्षमता है, लेकिन पैसे की कमी उन्हें आगे बढ़ने से रोक देती है। उन्होंने कहा कि समाज को सिर्फ तत्काल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जरूरतमंद युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार, व्यवसाय और आर्थिक सहयोग के अवसर मिलें, ताकि वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें। आत्मनिर्भर बना व्यक्ति आगे किसी दूसरे जरूरतमंद का सहारा बन सकता है।
सेमिनार का संदेश—बदलाव की शुरुआत खुद से
- कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं, संगत, स्वयंसेवकों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
- गुरुद्वारा साहिब में लाइब्रेरी स्थापित करने की पहल, बच्चों और युवाओं में पढ़ने की रुचि बढ़ाने पर जोर
- संगत में अध्ययन की संस्कृति विकसित करने और तथ्य आधारित विचार साझा करने का आह्वान
- धार्मिक पुस्तकों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने का सुझाव
Created On :   21 Sept 2026 2:28 PM IST












