दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर में प्लास्टिक बंदी बेअसर , रोज निकलता है 100 टन प्लास्टिक

July 27th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। राज्य सरकार ने 23 जून 2018 को प्रदेश में प्लास्टिक बंदी की, इसके बावजूद नागपुर शहर में प्रतिदिन 100 टन प्लास्टिक निकलता है। प्लास्टिक बंदी से पहले और बंदी के बाद प्लास्टिक कचरे के प्रमाण में खास अंतर नहीं आया है। इससे साफ होता है कि प्रदेश सरकार की प्लास्टिक बंदी नागपुर में बेअसर रही है।

प्रतिदिन 1200 टन कचरा संकलन

शहर में प्रतिदिन 1200 टन कचरा निकलता है। कचरा संकलन का ठेका कनक रिसोर्सेस मैनेजमेंट को दिया गया है। शहर में जगह-जगह कचराघर बनाए गए हैं। बस्ती का कचरा वहां इकट्ठा किया जाता है। इसे उठाकर भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड में डाला जाता है। गीला, सूखा कचरा एक ही जगह जमा किया जाता है। हालांकि कचरा जमा करने वाले वाहनों में गीला, सूखा कचरे के अलग-अलग कंपार्टमेंट बनाए गए हैं। यह नियम कागजों तक सीमित रहा गया है। संपूर्ण कचरा एक जगह इकट्ठा कर डंपिंग यार्ड में फेंक दिया जाता है।

दावा : प्रतिदिन निकलता है प्लास्टिक कचरा

कचरा संकलन करने वाली कनक सिसोर्सेस मैंनेजमेंट के पास अलग से प्लास्टिक कचरा संकलन की कोई व्यवस्था नहीं है। संपूर्ण कचरा भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड में डाले जाने पर मजदूर इसमें से प्लास्टिक चुनकर अलग करते हैं। इसे कारखाने में बेंचकर परिवार का पेट पालते हैं। मजदूर प्लास्टिक का ठोस कचरा चुनकर बाकी वहीं छोड़ देते हैं। आधे से ज्यादा प्लास्टिक डंपिंग यार्ड में छूट जाता है। मनपा के सूत्रों का कहना है कि प्रतिदिन 100 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। जबकि जानकारों का मानना है कि प्लास्टिक कचरे का प्रमाण मनपा के आंकड़ों के ज्यादा  है।

राज्य में प्लास्टिक बंदी लागू होने पर शहर में एक वर्ष में 15 टन 37 किलो प्लास्टिक जब्त की गई। मनपा क्षेत्र में प्लास्टिक बंदी के अधिकार उपद्रव शोध दल को दिए गए हैं। 818 दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई कर 40 लाख 75 हजार 300 रुपए जुर्माना वसूल किया गया। 99 दुकानदारों को नोटिस जारी किए गए हैं। एक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। उपद्रव शोध दल में 41 कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रत्येक जोन में 4 कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। संपूर्ण शहर में प्लास्टिक बंदी के अतिरिक्त 21 प्रकार की कार्रवाई की जिम्मेदारी संभाल रहे उपद्रव शोध दल में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या नाकाफी रहने से प्लास्टिक बंदी के अपेक्षित परिणाम नहीं आ रहे हैं।

गीला 300, सूखा 600 टन कचरा

गीला और सूखा कचरे का वर्गीकरण नहीं किया जाता। बस्ती में कचरा संकलन करने वाली गाड़ियों में गीला और सूखा कचरा एक ही जगह इकट्ठा किया जाता है। मनपा का दावा है कि गीला कचरा 300 से 350 टन और सूखा कचरा 600 टन निकलता है। जब गीला, सूखा कचरा अलग-अलग जमा नहीं होता, तो इसके आंकड़े कहां से पेश किए जा रहे हैं। इस सवाल का जवाब मनपा प्रशासन के पास नहीं है।

सख्ती से  होगा अमल 

संकलित कचरे में प्रतिदिन 50 टन प्लास्टिक निकलती है। भविष्य में गीला, सूखा कचरा अलग-अलग संकलन कर संपूर्ण कचरे पर प्रक्रिया करने की योजना है। कचरा संकलन की नई टेंडर प्रक्रिया चल रही है। टेंडर में प्लास्टिक, गीला, सूखा कचरा अलग-अलग संकलन करना अनिवार्य किया गया है। नई एजेंसी की नियुक्ति होने पर सख्ती से अमल किया जाएगा। -डॉ. सुनील कांबले, स्वास्थ्य अधिकारी, मनपा

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