दैनिक भास्कर हिंदी: सरकार की नजर से बच नहीं पाएंगे सक्षम राशन धारक, 3.21 लाख कार्डधारकों की होगी जांच

June 17th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। आर्थिक रूप से सक्षम, फिर भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीसी) के तहत राशन  का लाभ उठाने वाले अब सरकार की नजर से बच नहीं पाएंगे। इस फर्जीवाड़े पर आंखें तरेरते हुए राज्य सरकार ने बीपीएल, अंत्योदय और प्राधान्य गट अंतर्गत आने वाले कार्ड धारकों की जांच कर अपात्र लोगों के राशन कार्ड रद्द करने के आदेश दिए हैं। 3.21 लाख कार्ड धारकों की जांच की जाएगी। कार्ड धारक पात्र हैं या अपात्र, इसकी जांच के लिए पहली बार आरटीओ और राजस्व विभाग के कागजातों का सहारा लिया जाएगा।

अगर किसी के पास दोपहिया-चार पहिया वाहन हैं तो उसका नाम आरटीओ में रजिस्टर्ड होगा। इसी तरह किसी के नाम जमीन की मालकियत है तो उसके लिए राजस्व विभाग का रिकार्ड खंगाला जाएगा। इस रिकार्ड के आधार पर कार्ड धारकों को अपात्र ठहराकर उनके राशन कार्ड रद्द किए जाएंगे। इस संबंध में राज्य सरकार ने सभी महत्वपूर्ण विभागों को परिपत्रक जारी कर बड़े पैमाने पर मुहिम चलाने के आदेश दिए हैं। विशेष यह कि हर 6 महीने में राशन कार्ड का पुनर्विलोकन कर उसकी रिपोर्ट सरकार को पेश करने के आदेश दिए गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस अभियान से जरूरतमंद लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का फायदा होगा और अपात्र बाहर होंगे। 

अब इसलिए पड़ी जरूरत

वर्ष 2012-13 में लोकलेखा समिति ने अपने लेखा परीक्षण में पाया था कि अपात्र राशन कार्ड धारकों का नियमित पुनर्विलोकन नहीं होने से सैकड़ों अपात्र परिवार, पीडीएस सिस्टम का लाभ उठा रहे हैं। हालांकि इसके पहले केंद्र सरकार ने भी अपात्र राशन कार्ड धारकों के खिलाफ शोध मुहिम चलाकर राशन कार्ड रद्द करने की सूचना की थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया था। सरकार ने अब लोकलेखा समिति की रिपोर्ट को गंभीरता से लेकर उसकी सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू कर राशन कार्ड धारकों की जांच करने का आदेश दिया है। इस संबंध में अन्न नागरी आपूर्ति विभाग व ग्राहक संरक्षण विभाग ने 22 जून को सभी महत्वपूर्ण विभागों को परिपत्रक जारी किया है। 

शहर में 6 लाख कार्ड धारक 

नागपुर शहर में करीब 6 लाख राशन कार्ड धारक हैं। इसमें प्राधान्य गट में 2 लाख 65 हजार, अंत्योदय गट में 40 हजार और अन्नपूर्णा गट में 16 हजार राशन  कार्ड धारक हैं। इन्हें नियमानुसार सरकारी दुकानों से नियमित राशन (गेहूं, चावल, दाल, मिट्टी तेल) मिलता है। बीपीएल को अंत्योदय में शामिल करने से बीपीएल श्रेणी बंद कर दी गई है। शेष 2 लाख 80 हजार कार्ड धारकों को सरकारी राशन का लाभ नहीं मिलता है। सरकार ने वार्षिक आय 59 हजार रुपए से अधिक कमाने वालों को सरकारी राशन का लाभ देने से मना कर दिया है। फिलहाल 2 लाख 40 हजार कार्ड धारकों की वार्षिक आय  59 हजार से ज्यादा और एक लाख रुपए से कम है, जबकि 40 हजार कार्ड धारकों की वार्षिक आय एक लाख रुपए से अधिक है। इस कारण इन्हें सफेद राशन कार्ड देकर लाभ से वंचित रखा गया है।

4 साल पहले नागपुर में  14 हजार कार्ड किए थे रद्द 

सरकारी राशन को लेकर अनेक मामले सामने आते रहे हैं। यह शिकायतें आम हो चली हैं कि जरूरतमंदों को इसका फायदा नहीं मिलता और रसूखदार इसका लाभ उठा ले जाते हैं। इन शिकायतों को देखते हुए राज्य सरकार ने चार साल पहले भी राशन कार्ड धारकों की पहचान के लिए एक अभियान चलाया था। तब अन्न व खाद्य आपूर्ति प्रशासन के अधिकारियों ने घर-घर जाकर राशन कार्ड धारकों की पहचान की थी। ये देखा था कि वाकई राशन कार्ड धारक अपने पते पर रहते हैं या नहीं। उस समय नागपुर शहर में 14 हजार राशन कार्ड धारक अपने पते पर नहीं मिले थे, जिसके बाद उन्हें नोटिस जारी कर राशन कार्ड रद्द कर दिया था। हालांकि यह नोटिस जारी होने के बाद 8 हजार राशन कार्ड धारकों ने अन्न व खाद्य आपूर्ति कार्यालय में जाकर स्पष्टीकरण दिया था। किसी ने बताया कि वे रिश्तेदार के यहां चले जाने से जगह पर नहीं मिल पाए, तो किसी ने कहा कि उन्होंने घर बदल दिया। इसके बाद फिर 8 हजार कार्ड धारक पीडीएस सिस्टम में लौट आए। 

सरकार के आदेश का पालन होगा 

फिलहाल सरकार का नया परिपत्रक हम तक नहीं पहुंचा है, लेकिन सरकार के आदेश का पालन होगा। चार साल पहले भी घर-घर जाकर अपात्र लाभार्थियों की जांच की गई है। अब सभी के पास आधार नंबर होने से अपात्र लोगों की पहचान करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।  -लीलाधर वार्डेकर, शहर अन्न आपूर्ति अधिकारी व उपजिलाधिकारी, नागपुर 

खबरें और भी हैं...