comScore

जिला चिकित्सालय में12 घंटे में 6 बच्चों की मौत  - सीएम ने लिया संज्ञान

जिला चिकित्सालय में12 घंटे में 6 बच्चों की मौत  - सीएम ने लिया संज्ञान

 स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के निर्देश
डिजिटल डेस्क शहडोल ।
जिला चिकित्सालय शहडोल में 12 घंटे में 6 बच्चों की मौत हो गई। मरने वाली बच्चों में सभी 2 से ढाई महीने के थे। इस घटना को बड़ी लापरवाही मानते हुए सीएम कमलनाथ ने संज्ञान में लिया और स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट द्वारा मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच क्षेत्रीय प्रवास पर पहुंचे मप्र के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल ने जिला चिकित्सालय पहुंचे और बच्चों की मौत के मामले की जांच कराने के निर्देश कमिश्नर को दिए। इसके बाद प्रभारी कलेक्टर पार्थ जायसवाल द्वारा जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है।
बताया गया है कि बीते बीते 12 घंटों के अंदर चिकित्सालय में भर्ती जिन 6 बच्चों की मौत हुई उनमें से 2 बच्चे बच्चा वार्ड में तथा 4 बच्चों के एसएनसीयू में भर्ती किया गया था। अस्पताल सूत्रों के अनुसार पड़मनियां निवासी दो महीने के सूरज बैगा को मंगलवार की सुबह 4 बजे भर्ती किया गया। 5.45 बजे मौत हुई। अनूपपुर जिले के आए श्याम कोल को 13 जनवरी की रात 1.35 बजे भर्ती किया गया। वेंटिलेटर में सुबह 3.30 बजे मौत हुई। सुभाष बैगा की धड़कन नहीं चल रही थी। 13 की सुबह 6.30 बजे भर्ती किया गया, 2.30 बजे मौत हो गई। इसी प्रकार अंजली बैगा 13 को 7.35 बजे भर्ती हुई, 2.15 बजे मौत हुई। चैत कुमारी की बेटी रेफर होकर 30 दिसबर को आई थी, 13 जनवरी की रात्रि 10.30 बजे मौत हुई। जबकि फूलमती की पुत्री जयसिंहनगर से रेफर होकर आई थी, वजन 950 ग्राम था, 8 जनवरी को भर्ती हुई और 14 की सुबह 7.30 बजे मौत हुई। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील हथगेल ने बताया कि मृतक बच्चों में तीन को अति गंभीर किस्म का निमोनिया था।भर्ती होते समय एक की सांस लगभग नहीं चल रही थी। बाकी दो रेफर केस थे, जिनकी हालत पहले से ही गंभीर थी।
मंगलवार का दिन 8 परिवारों के लिए काला दिन साबित हुआ। जिला चिकित्सायल में 12 घंटे के भीतर 6 बच्चों की मौत हुई, वहीं सिंहपुर थाना क्षेत्र में कुंए में गिरने से दो बच्चों की मौत हो गई। शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए आधुनिक संसाधनों से युक्त अमला काम कर रहा है। इसके बाद भी जिले से न तो कुपोषण मिट पा रहा है और न ही शिशुओं की मौत रुक पा रही है। एक वर्ष के भीतर 103 से बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से आधे से ज्यादा गंभीर बीमारियों से ग्रसित पाए गए हैं। वहीं 13 जनवरी से लेकर 14 जनवरी के बीच 12 से 14 घंटे के बीच में जिला चिकित्सालय में 6 बच्चों की मौत ने व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इनमें से 3 बच्चे तो अति गंभीर निमोनिया से पीडि़त रहे। एक बच्चे का वजन एक किलो भी नहीं था। 24 घंटे के भी कम समय में हुई 6 बच्चों की मौत के मामले को प्रदेश सरकार को सकते में ला दिया है। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा कमिश्नर को जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच अनूपपुर दौर पर जा रहे प्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल को मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने जिला चिकित्सालय शहडोल पंहुचकर कर निरीक्षण किया। उन्होने इस घटना की चिकित्सकीय टीम गठित कर जांच करने के निर्देश कमिश्नर को दिए।
कागजों तक सीमित एडवाजरी
बच्चों की ज्यादातर मौत का कारण निमोनिया को बताया जा रहा है। मौसम में आने वाले बदलावों की वजह से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वार समय-समय पर एडवाजरी जारी की जाती है, लेकिन वह कागजों तक ही सीमित रहते हैें। मैदानी अमले की बात की जाए तो हजारों आशा व ऊषा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्येकर्ता व स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला कार्य कर रहा है लेकिन उनके द्वारा लोगों तक उचित सलाह नहीं पहुंचाई जाती। यही कारण है कि जब बच्चों की हालत गंभीर हो जाती है तो माता-पिता अस्पताल लेकर पहुंचते हैं।
विभाग का दावा मौत तत्कालिक नहीं
जिला स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिन बच्चों की मौतें हुई हैं उनमें किसी की भी मौत तत्कालिक नहीं रहे। सभी बच्चों को अति गंभीर हालत में भर्ती किया गया था। प्रभारी कलेक्टर की ओर से मंत्रालय को भेजे गए प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार प्रथम दृष्टया लापरवाही प्रतीत नहीं हो रही है। दो बच्चे पूर्व से भर्ती थे जो वेंटिलेटर में थे। एक बच्चे का वजन कम था। तीन को निमोनिया था। विभाग के अनुसार मृतक अंजली को सांस लेने में दिक्कत थी, खून की कमी थी। चैत कुमारी की बेटी को 30 दिसंबर से वेंटिलेटर में थी, झटके आ रहे थे, धड़कन नहीं चल रही थी। फूलमती की संतान को पीलिया था चजन 950 ग्राम रहा। सूरज बैगा, श्याम कोल व सुभाष बैगा तीनों को गंभीर निमोनिय था, सांस लेने में भारी दिक्कत थी।
तीन सदस्यीय करेगी जांच
प्रभारी कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत पार्थ जायसवाल ने जिला चिकित्सालय में हुई बच्चों की मृत्यु प्रकरण की जांच हेतु जांच टीम गठित की है। जांच टीम में डिप्टी कलेक्टर केके पाण्डेय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश पाण्डेय एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास मनोज लारोलकर शामिल है। जांच टीम को निर्देशित किया गया है कि तत्काल जांच कर विस्तृत जांच प्रतिवेदन स्वयं उपस्थित होकर प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।
इनका कहना है
प्रारंभिक जांच में किसी की लापरवाही सामने नहीं आई है। जिन 6 बच्चों की मौत हुई उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मामले की जांच कराई जा रही है।
डॉ. राजेश पाण्डेय, सीएमएचओ

कमेंट करें
oirIF