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एडीआर ने जानी जनता की प्राथमिकता, 48% चाहते हैं रोजगार के अच्छे अवसर, 43% शुद्ध पानी

एडीआर ने जानी जनता की प्राथमिकता, 48% चाहते हैं रोजगार के अच्छे अवसर, 43% शुद्ध पानी

डिजिटल डेस्क,नागपुर। जनता के बीच जाकर जनता को अपनी उपलब्धि गिनाना हर सरकार का काम है, लेकिन वह जनता की कितनी प्राथमिकताओं पर खरी उतरती है, यह तो मतदान के बाद ही पता चलता है। लोगों का मूड जानने के लिए एडीआर ने राज्य की जनता की प्राथमिकता जानी। देश की तरह राज्य की जनता का भी मूड दिखा। अपनी प्राथमिकताओं ने मतदाताओं ने राज्य में रोजगार के अच्छे अवसरों को पहली प्राथमिकता सूची में रखा है। हालांकि रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में सरकार को औसत ही माना है। न बहुत संतुष्ट, न बहुत ज्यादा नाराज। 5 अंकों में से जनता ने सरकार के 2.27 प्रतिशत ही अंक दिए।

एडीआर ने वर्ष 2018 के अंत में महाराष्ट्र में मतदाताओं के बीच जाकर एक सर्वेक्षण किया। इसमें जनता से उनकी 10 पहली प्राथमिकताओं की सूची बनाई है। 
48 प्रतिशत जनता ने माना कि राज्य में रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। इस मामले सरकार को औसत से कम अंक दिए हैं। 
43 प्रतिशत जनता चाहती है कि उन्हें शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध हो। इस मामले में सरकार को औसत से भी कम माना गया। 
35 प्रतिशत जनता चाहती है कि उन्हें ट्रैफिक समस्या से निजात मिले। सरकार ने इस दिशा में ज्यादा ध्यान देना चाहिए। 
34 प्रतिशत मतदाता अच्छी सड़क की अपेक्षा करते हैं। 2.32 यानी औसत से कम लोग ही सरकार को इसमें बेहतर मानते हैं। 
34 प्रतिशत मतदाता ध्वनि प्रदूषण को बड़ी समस्या में गिनते हैं। सरकार को इसके समाधान के लिए औसत के करीब अंक दिए हैं। 
32 प्रतिशत पानी और वायु प्रदूषण को मुख्य समस्या मानते हैं। 2.72 यानी औसत लोग मानते हैं कि सरकार ने इस दिशा में काम किया।
31 प्रतिशत मतदाता स्वास्थ्य सेवा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिकता बताते हैं। 2.68 यानी औसत मतदाता मानते हैं कि इस पर काम हुआ है। 
30 प्रतिशत लोग बेहतर परिवहन व्यवस्था की जरूरत बताते हैं। औसत लोग यानी 2.64 अंक के साथ मतदाता सरकार से संतुष्ट नजर आते हैं। 
26 प्रतिशत मतदाता बेहतर कानून व्यवस्था राज्य की प्राथमिकता मानते हैं। 2.72 यानी औसत मानते हैं कि सरकार इस बारे में कुछ कर रही है।

औसत अंक ही जनता ने दिए 
25 प्रतिशत मतदाता पैदल और साइकिल चलाने वालों के लिए बेहतर सुविधा को प्राथमिकता में रखते हैं। औसत यानी 2.68 अंक के साथ मतदाता बताते हैं कि सरकार इस दिशा में कुछ किया है। विशेष यह कि इस पूरे सर्वेक्षण में सरकार को किसी भी मामले में बेहतर की श्रेणी में नहीं रखा गया है। सभी को औसत दर्जे के तहत अंक मिले है।

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