चूहों में पाए जाने वाले जीवाणु से यह बीमारी फैलती है: भोपाल, रायसेन के बाद छिंदवाड़ा में मिले स्क्रब टाइफस के चार मरीज

September 8th, 2021

डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा । स्क्रब टाइफस के अब तक शहर में चार मरीज मिल चुके हैं जिनका निजी अस्पताल में उपचार जारी है। चूहों में पाए जाने वाले जीवाणु से यह बीमारी फैलती है। मेडिकल कॉलेज छिंदवाड़ा में मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शशिकांत आर्य ने बताया कि स्क्रब टायफस का पहला केस निजी क्लीनिक में 28 अगस्त को मिला था। चूहे के शरीर में पाए जाने वाले ओरिएंटा सुुसु कैमोसी नामक जीवाणु के काटने से यह बीमारी होती है। बीते 11 दिनों में 4 मरीज इस बीमारी से पीडि़त मिले हैं। स्क्रब टायफस एंटीबॉडी टेस्ट के जरिए यह बीमारी का पता चल सका। चारों मरीजों की हालत अब सामान्य है। हालांकि स्क्रब टाइफस बीमारी को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट नहीं है। विभाग तो यह मानने को भी तैयार नहीं है कि जिले में स्क्रब टाइफस के कोई मरीज मिले हैं।
ये हैं बीमारी के लक्षण
जिस स्थान पर जीवाणु ने काटा है वहां लाल रंग का एक निशान बन जाता है। मितली आना, उल्टियां होना, जोड़ों में दर्द होना, तेज बुखार व सांस लेने में तकलीफ होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। संक्रमण अधिक बढऩे पर गर्दन, बाजुओं के नीचे, कूल्हे के ऊपर गिल्ठियां पड़ जाती है। समय पर उपचार नहीं कराने पर जान का भी खतरा बना रहता है।
ऐसे बचें इस बीमारी से
स्क्रब टाइफस के लिए अभी तक कोई टीका उपलब्ध नहीं है। यह जीवाणु प्राय: जंगलों व झाड़ वाले इलाकों में ज्यादा होते हैं। यदि आप भी ऐसे स्थानों पर जा रहे हैं तो सावधानी बरतें। इस कीड़े के काटने पर तुरंत उस हिस्से को धोकर एंटीबायोटिक दवाएं लगाएं।
एलाइजा टेस्ट ही होगा मान्य
महामारी नियंत्रण प्रभारी डॉ सुशील राठी का कहना है कि अब तक जिले में स्क्रब टाइफस के कोई केस सामने आए हैं इसकी जानकारी नहीं है। इस बीमारी को डिटैक्ट करने के लिए एलाइजा टेस्ट कराया जाता है। एलाइजा टेस्ट के लिए एक भी सेम्पल नहीं नहीं आए हैं।
 

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