comScore

राज्यपाल श्री लालजी टण्डन के अवसान पर मध्यप्रदेश में पांच दिन का राजकीय शोक मुख्यमंत्री चौहान और मंत्रिमंडल ने दी श्रद्धांजलि

July 22nd, 2020 17:35 IST
राज्यपाल श्री लालजी टण्डन के अवसान पर मध्यप्रदेश में पांच दिन का राजकीय शोक मुख्यमंत्री चौहान और मंत्रिमंडल ने दी श्रद्धांजलि

डिजिटल डेस्क, भिण्ड। भिण्ड राज्यपाल श्री लालजी टण्डन के अवसान पर प्रदेश में पांच दिन 21 से 25 जुलाई तक राजकीय शोक घोषित किया गया है। आज मंगलवार समस्त शासकीय कार्यालय बंद रहेंगे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रिपरिषद बैठक में यह जानकारी देते हुए बताया कि राज्यपाल श्री टण्डन के अवसान पर शोक स्वरूप आज की मंत्रिपरिषद बैठक में अन्य विषयों पर चर्चा न कर स्थगित की गई है। मंत्रिपरिषद की बैठक 22 जुलाई को होगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि प्रदेश में राष्ट्र ध्वज झुके रहेंगे। राजकीय शोक की अवधि में प्रदेश में मनोरंजन के कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं होंगे। इस संबंध में सभी जिलों को निर्देश भेजे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि वे मध्यप्रदेश की जनता की ओर से दिवंगत श्री टण्डन को श्रद्धांजलि देने के लिए लखनऊ जा रहे हैं। इस अवसर पर समस्त मंत्रिपरिषद ने खड़े होकर दो मिनिट का मौन धारण कर राज्यपाल श्री टण्डन को श्रद्धांजलि दी। आजीवन राष्ट्र की सेवा की स्व. श्री लालजी टंडन नेरू मुख्यमंत्री श्री चौहान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्यपाल श्रद्धेय श्री लालजी टंडन के अवसान का दुरूखद समाचार आज प्रातः मिला। वे जीवनभर राष्ट्र सेवा में संलग्न रहे। उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा।श्री टंडन सार्वजनिक जीवन में शुचिता के प्रतीक थे। मध्यप्रदेश में राज्यपाल के रूप में उन्होंने हमेशा जनहित में मार्गदर्शन और प्रेरणा दी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में उनके सुझाए नवाचार को हम सबने देखा है। उन्होंने राजभवन में न सिर्फ गौशाला का संचालन करवाया,बल्कि वे स्वयं यह कहते भी थे कि मैं इस प्रयोग को सफल करके बताऊंगा। वे आने वाले प्रत्येक अतिथि का हृदय से सत्कार करते थे। राजनीति में आपसी सौहार्द और संबंधों को हमेशा उन्होंने वरीयता दी। हमेशा उनकी सोच यही थी कि राजनीति सेवा का माध्यम है। दल कोई भी हो लेकिन सभी को मिलजुल कर राष्ट्र की सेवा करना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 12 अप्रैल 1935 को जन्मे श्री लाल जी टंडन ने सात दशकों की सुदीर्घ समाज सेवा का सार्वजनिक जीवन बड़ी जीवंतता से जीया। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से गहरा तादात्म्य स्थापित किया। सबको साथ लेकर चलने और अजातशत्रु रहकर समाजहित में कार्य करने की अटूट आत्मशक्ति उनके व्यक्तित्व में समाहित थी। निरंतर क्रियाशील रहने के कारण ही जन कल्याणकारी कार्यों की बड़ी लम्बी श्रृखंला उनके खाते में है। वे उन चंद जन नेताओं में रहे। जिन्होंने राष्ट्र सेवा और नैतिक मूल्यों की साधना राजनीति के माध्यम से की और अन्त्योदय की भारतीय अवधारणा को साकार किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सार्वजनिक जीवन की ऐसी उदात्त, व्यापक और तपी हुई पृष्ठभूमि के साथ विधान परिषद में जब वर्ष 1978 में टंडन जी पहुँचे थे तो वहॉं भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी और संसदीय मर्यादाओं को नयी ऊॅंचाइयॉं दी। उत्तरप्रदेश विधान परिषद के दो बार सदस्य रहने के अलावा उन्होंने वहॉँ नेता सदन की भी भूमिका निभायी। विधान सभा के लिए तीन बार चुने गये। वहॉं नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में उन्होंने बताया कि विरोध के स्वर कैसे होने चाहिए और शालीन रहकर भी सरकार को जन-आवाज सुनने के लिए किस प्रकार बाध्य किया जा सकता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि उत्तरप्रदेश के वरिष्ठ मंत्री के रूप में तो टंडन जी का हर कदम प्रगति की एक नयी दास्तान बनता चला गया और नये-नये कीर्तिमान रचे जाने लगे। पांच बार मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने के साथ उन्होंने उर्जा, आवास, नगर विकास, जल संसाधन जैसे भारी भरकम विभाग संभाले। अपने प्रशासनिक कौशल, दूरदृष्टि और दृढ़संकल्प से टंडन जी ने उत्तरप्रदेश के करोड़ों नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचाया। इन विभागों की दशा और दिशा बदल दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मंत्री के रूप में श्री टंडन द्वारा किये गये सुधार और बदलाव अविस्मरणीय है। अन्त्योदय की भारतीय अवधारणा को साकार करने के लिए दबे-कुचले और वंचित वर्ग के लिए उस समय जो योजनाएं टंडन जी के नेतृत्व में बनायी गयीं, वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित हुईं। पांच रूपये, दस रूपये और पंद्रह रूपये रोज पर दबे-कुचले तबके को मकान का मालिकाना हक दिलाने की स्वप्निल योजना उन्होंने साकार की थी। यही नहीं आवास के साथ एक फलदार वृक्ष और एक दुधारू पशु देने की योजना टंडन जी की बहुआयामी सोच का परिणाम थी। उन्होंने गरीबी-उन्मूलन के लिए बड़े पैमाने पर जमीनी कार्य हुए। सामुदायिक केंद्र बने, रैन बसेरे बने, मलिन बस्तियों का कायाकल्प हुआ। मथुरा-वृंदावन की खारे पानी की बड़ी समस्या क

कमेंट करें
sP284
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।