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सरकार की नीति से जो ठेकेदार हैं सहमत वो 3 दिन में दें शपथपत्र, असहमत की दुकानें फिर से नीलाम करने सरकार स्वतंत्र

सरकार की नीति से जो ठेकेदार हैं सहमत वो 3 दिन में दें शपथपत्र, असहमत की दुकानें फिर से नीलाम करने सरकार स्वतंत्र

 हाईकोर्ट ने सुनवाई 17 जून तक मुल्तवी करके यह भी कहा- नई शराब नीति को न मानने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सरकार नही करेगी कोई भी कार्रवाई 
डिजिटल डेस्क जबलपुर । प्रदेश के शराब ठेकेदारों की याचिका पर आज लगातार चौथे  दिन भी बहस जारी रही।   बुधवार को चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने 25 मामलों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से  सुनवाई के बाद कहा है कि जो भी याचिकाकर्ता ठेकेदार सरकार की नीति से सहमत हैं, वो 3 दिनों में अपने अपने शपथपत्र पेश करें। जो तैयार नही हैं, उनकी दुकानें की फिर से नीलामी करने सरकार स्वतंत्र होगी, लेकिन यह कार्रवाई कोर्ट के फैसले से बाध्य होंगी। अगली सुनवाई 17 जून को होगी।
माँ वैष्णो इंटरप्राईजेस व अन्य शराब ठेकेदारों की ओर से दायर इन मामलों में वर्ष 2020-2021 के लिए अपनाई गई टेंडर की प्रक्रिया को कटघरे में रखा गया है। ठेकेदारों ने राहत चाही है कि सरकार या तो उनसे ली गई राशि को लौटाकर फिर से टेण्डर कराए या फिर उनसे ली गई बिड की राशि सरकार द्वारा घटाई जाए। इन मामलों पर बुधवार को सुबह दस बजे से दोपहर 2 बजे तक चली सुनवाई के दौरान मुद्दा लाईसेन्सी शब्द पर उलझ गया था । एक तरफ ठेकेदारों का दावा था कि चूंकि उन्हें लाईसेन्स जारी नहीं हुआ इसलिए वे लाईसेन्सी नहीं माने जा सकते। वहीं सरकार का दावा है कि ठेकेदारों की निविदा स्वीकार होते ही, अनुबंध की शुरुआत हो जाती है और उसके बाद ठेकेदार पीछे नहीं हट सकते। ऐसे में वे स्वत: ही लाईसेन्सी की परिभाषा में आ जाते हैं और उन पर निविदा की सभी शर्तों और सारे प्रावधान भी लागू हो जाते हैं। याचिकाकर्ता ठेकेदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, नमन नागरथ, विकास सिंह, अधिवक्ता संजय अग्रवाल, संजय के वर्मा, राहुल दिवाकर, हिमान्शु मिश्रा कपिल बाधवा, गुंजन चौकसे, शांतनु श्रीवास्तव, मनु माहेश्वरी, एमपीएस रघुवंशी, आलोक कटारे, प्रशांत शर्मा व
डीके अरुण और राज्य सराकर की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इण्डिया तुषार मेहता, महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव, एएजी सौरभ मिश्रा व अधिवक्ता कनु अग्रवाल ने पक्ष रखा।
 

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