दैनिक भास्कर हिंदी: बाघिन की प्री मैच्योर डिलेवरी से तीन शावकों की मौत, ट्रंक्यूलाइज करने का दुष्प्रभाव

May 5th, 2018

डिजिटल डेस्क शहडोल । कटनी के बरही इलाके में आतंक का पर्याय रही बाघिन ने रेस्क्यू ऑपरेशन के 10 दिन बाद बांधवगढ़ में तीन शावकों को जन्म दिया। बहेरहा इंक्लोजर में जन्म के साथ ही तीनों शावक मरे हुए मिले हैं। इनमें से दो की आंख भी नहीं खुली थी। माना जा रहा है कि बरही में ट्रंक्यूलाइज करने के दौरान बाघिन को दवाओं की ओवरडोज दी गई और उसने समय से पहले ही बच्चों को जन्म दे दिया। बहरहाल बाघिन को सघन सुरक्षा घेरे के बीच रखा गया है।  कटनी जिले के बरही रेंज में बाघिन व उसके दो शावकों ने आतंक मचा रखा था। कुआं, करौंदी व कुठिया महगमा में तीन ग्रामीण इनका शिकार बन चुके थे। काफी हंगामे के बाद 22 अप्रैल को ट्रंक्यूलाइज कर बाघिन को बांधवगढ़ लाया गया था, जहां से इसे दूसरी जगह शिफ्ट करना था। 

डॉक्टर रवाना 
शावकों की मौत के बाद से मचमचा वाली बाघिन दो शावकों को खुद से अलग कर चुकी है। एक शावक उसके आसपास मिला है। घटना की खबर फैलते ही प्रबंधन में हड़कंप की स्थिति है। बांधवगढ़ डायरेक्टर मृदुल पाठक अपनी टीम के साथ नौरादेही अभ्यारण रेस्क्यू करने गए हुए हैं। मौत की खबर से एक्सपर्ट की एक टीम भोपाल से भी भेजी जा रही है। 

प्रेग्नेंट बाघिन को नहीं करना चाहिए ट्रेंक्यूलाइज 
प्रेग्नेंट बाघिन को एथिकली ट्रेंक्यूलाइज नहीं करना चाहिए, जब तक कि वह मानव जीवन के लिए खतरा न हो। ट्रेंक्यूलाइज करने से प्री-मैच्योर डिलेवरी का खतरा रहता है। किसी को भी ट्रेंक्यूलाइज करने के लिए बॉडी के वजन के हिसाब से दवा दी जाती है। इंसानों में तो वजन आसानी से हो जाता है, लेकिन जानवरों को दवा का डोज अंदाज से ही दिया जाता है। जानवरों खासकर टाइगर को बेहोश करने के लिए जाइलोजिन का डोज दिया जाता है। जल्दी होश न आ जाए इसलिए दवा का डोज अधिक देते हैं। इसी तरह होश में आने के लिए कीटामिन का डोज दिया जाता है। इससे भी प्रेग्नेंट बाघिन के प्री-मेच्योर डिलेवरी का खतरा रहता है। 
-सुदेश बाघमारे, रिटायर्ड डायरेक्टर वन विहार भोपाल 

मचमचा वाली बाघिन ने प्रीमैच्योर डिलेवरी में तीन शावकों को जन्मा था। तीनों की मौत हो गई थी। दो की आंख भी नहीं खुली थी। डॉक्टरों की टीम बांधवगढ़ पहुंच रही है। जांच के बाद मौत के कारणों का रहस्य पता चल सकेगा। 
अनिल शुक्ला, एसडीओ बीटीआर