दैनिक भास्कर हिंदी: ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय, मोको कहाँ ढूँढे रे बन्दे नाटक का मंचन

February 2nd, 2019

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय। कबीर की प्रासंगिकता हर युग और समय में बनी रहेगी। कबीर का पूरा संघर्ष अपने समय से था और सच में देखें, तो वह समय उनके जन्म के बाद से लेकर आज तक जस का तस है। आज जब विज्ञान और अध्यात्म में पूरा देश जुगलबंदी कर रहा है, तब कबीर के जीवन, उनके कथन और उनके संघर्ष को जनता के समक्ष रखता है नाटक- मोको कहां ढूंढे रे बन्दे, जिसका मंचन विवेचना रंगमंडल के राष्ट्रीय नाट्य समारोह रंग परसाई 2019 के पहले दिन शनिवार को तरंग प्रेक्षागृह में हुआ। अंधविश्वास और रूढ़िवादिता पर कबीर के रचनात्मक प्रहार व्यक्ति को कैसे संबल प्रदान करते हैं, नाटक में नजर आया। रमेश खत्री के लिखे नाटक को विवेचना रंगमंडल के कलाकारों ने अरुण पांडेय के निर्देशन में मंचित किया।

पूर्वरंग में कथक
नाट्य समारोह का शुभारंभ महाधिवक्ता राजेंद्र तिवारी,जस्टिस एमव्ही तामस्कर, ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी पीएआर बेंडे, पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के सीजीएम मकरंद चिंचोलकर, सत्यदेव त्रिपाठी एवं वरिष्ठ समीक्षक-लेखक की मौजूदगी में दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। पूर्वरंग में शैली धोपे के निर्देशन में बच्चों ने कथक प्रस्तुति देकर समां बांधा। कलाकरों के अभिनय को देख सभी ने उनके अभिनय की खूब सराहना की।

नाटक के बारे में
नाटक में सिद्धार्थ श्रीवास्तव, यशी जैन, एस. श्रीधर, ईशानी मिश्रा, दिया माटा, शिवम यादव, काव्या माटा, शशांक सोनी, भावना नायक, निखिलेश, ललित, अनुराग, नीलेश, सावन, वासिफुद्दीन, सौरभ आदि ने विभिन्न भूमिकाएं निभाई। संगीत निर्देशन डॉ. सुयोग पाठक का रहा।

तालियों से गूंज उठा आयोजन स्थल
नाट्य कलाकारों के अभिनय को देखकर आयोजन स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की जमकर तारीफ की। दर्शकों का कहना है कि ये नाट्य मंच कलाकारों को मंच प्रदान करते हैं। इस तरह के नाटक शहर में होतेग्रहने चाहिए, ताकि शहर के प्रतिभाशील कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें।