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दुर्ग : प्रकाश यादव का बाइक लेने का सपना हुआ पूरा : -देव सिंह यादव के पिता के इलाज में गोधन न्याय योजना बनी सहारा

December 07th, 2020 16:38 IST
दुर्ग : प्रकाश यादव का बाइक लेने का सपना हुआ पूरा : -देव सिंह यादव के पिता के इलाज में गोधन न्याय योजना बनी सहारा

डिजिटल डेस्क, दुर्ग। मवेशी चराकर गुजारा करने वाले चरवाहों ने गोबर बेचकर हो रही अच्छी आमदनी दुर्ग 6 दिसंबर 2020 कभी-कभी कुछ ऐसा हो जाता है जिसकी उम्मीद भी नहीं होती। किसी ने नहीं सोचा था जिस गोबर की पहले कोई कीमत नहीं थी वही गोबर उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन जाएगा। पाटन जनपद पंचायत आर जामगांव में मवेशी चराकर और पशुपालकों के घरों में दूध दुहकर अपना जीवन यापन करने वाले चरवाहों को गोधन न्याय योजना ने सपने देखने का साहस दिया और उम्मीद दी। गोबर बेचकर मिले रूपयों से कोई अपने घर की मरम्मत करवा रहा है तो कोई मोटरसाइकिल खरीद रहा है तो किसी को इलाज के लिए मदद मिल गई है। गोबर बेचकर मिले रुपयों से देव सिंह यादव करवा रहे पिता का इलाज- गोधन न्याय योजना के तहत आर जामगांव के देव सिंह यादव ने गोधन न्याय योजना के तहत 8 हजार 525 किलो यानि करीब 85 क्विंटल गोबर बेचा। जिसके लिए करीब 17 हजार रुपए मिले। इन रुपयों से उन्हें पिता के इलाज के लिए मदद मिली। देव सिंह गांव में बर्दी यानि मवेशी चराकर गुजारा करते हैं जो कि इनका पैतृक काम है। जिसमें इनके बुजुर्ग पिता राम जी यादव भी इनका सहयोग करते हैं। जब हम आर जामगांव पहुंचे तो उनकी पत्नी मीना बाई से हमारी मुलाकात हुई, क्योंकि देवी सिंह बर्दी चराने गए हुए थे। मीना बाई ने बताया कि उनके ससुर रामजी यादव को लंबे समय से पैरों में तकलीफ रहा करती थी एक दिन मवेशी चराते-चराते वह गिर पड़े जिसकी वजह से उन्हें तकलीफ और बढ़ गई। ऐसे में इलाज बहुत जरूरी हो गया। गोधन न्याय योजना से मिले कुछ रुपयों से उन्होंने अपने घर की मरम्मत करवाई और बाकी से ससुर का इलाज करवा रहे हैं। मीना बाई ने बताया गोधन न्याय योजना के पहले वो और उनकी सास गांव में गोबर बीनकर उसे इकट्ठा करतीं और उनसे कंडे तैयार करतीं थी। लगभग खरही कंडों के लिए 1 हजार से 12 सौ रुपए मिल जाते थे। एक खरही कंडों के लिए एक ट्रेक्टर ट्राली मानकर चलिए करीब 3 टन गोबर लग जाता था दिन भर की मेहनत अलग। लेकिन गोधन न्याय योजना के तहत 1 किलो गोबर के लिए 2 रुपए मिल रहे। इस लिहाज से 3 टन गोबर से 6 हजार रुपए की आमदनी यानि कि चरवाहों को 4 से 5 गुना अधिक कीमत मिल रही है। मीना बाई कहती हैं कभी नहीं सोचा था गोबर बेचकर इतने रुपए मिलेंगे। गोबर बेचकर प्रकाश यादव ने अपना बरसों पुराना मोटरसाइकिल लेने का सपना पूरा किया- राज्य शासन की एक पहल ने न जाने कितने लोगों के सपने पूरे किए हैं। आर जामगांव के प्रकाश यादव का परिवार भी मवेशी चराकर ही गुजारा करता है। प्रकाश और उनके भाई प्रवीण का बरसों से सपना था कि उनके पास खुद की मोटरसाइकिल हो लेकिन एक चरवाहे के लिए यह सपना बहुत बड़ा था। लेकिन गोधन न्याय योजना से उनका ये सपना सच हुआ। इस बार गांव में सबसे ज्यादा 13 हजार 381 किलो यानि करीब 133 क्विंटल गोबर प्रकाश यादव ने ही बेचा है। जिससे प्रकाश यादव को करीब 27 हजार की आमदनी हुई जिसकी मदद से उन्होंने मोटरसाइकिल खरीदी। डाउन पेमेंट देकर दीपावली के दिन जब नई मोटरसाइकिल घर आई तो परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। दो चरणों मे 92 हजार 224 किलो गोबर खरीदा गया गोबर विक्रेताओं को 1 लाख 84 हजार से अधिक का भुगतान- यहां के सरपंच राजकुमार ठाकुर ने बताया कि चरवाहों के लिए ये योजना बहुत फायदेमंद साबित हुई है। क्योंकि गोबर एक तरह की से उनकी आय का जरिया बन गया है पहले इस गोबर से वह कंडे बनाते थे जिसे भेजकर उन्हें थोड़े रुपए मिल जाते थे। लेकिन अब सीधे गोबर बेच कर उनको पहले से ज्यादा आमदनी होने लगी है। ग्राम पंचायत सचिव नरेश महतो बताते हैं कि अब तक यहाँ 92 हजार 224 किलोग्राम यानि 92.22 टन गोबर खरीदी हुई है। पहले चरण में सोसायटी के माध्यम से 39 गोबर विक्रेताओं से 23.58 टन गोबर खरीदा गया जिसके लिये उन्हें 47 हजार से अधिक का भुगतान किया गया। दूसरे चरण में 67 गोबर विक्रेताओं से 68.64 टन गोबर खरीद कर 1 लाख 37 हजार रुपए से अधिक का भुगतान गोबर विक्रेताओं को किया गया है। उन्होंने बताया कि यहां 20 जुलाई से गोबर खरीदी शुरू हुई थी लेकिन गौठान में जगह नहीं होने के कारण बीच में खरीदी रोक दी गई थी। जब से गांव में महिला स्व सहायता समूहों ने गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करना शुरू किया है तब से गोबर की खपत बढ़ी है । इसलिए फिर से गोबर खरीदी प्रारंभ की गई है।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।