दैनिक भास्कर हिंदी: देश को प्रदूषण रहित परमाणु ऊर्जा की जरूरत : श्रीवास्तव

December 23rd, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। देश को सभी प्रकार की ऊर्जा की आवश्यकता है, इसमें परमाणु रहित ऊर्जा समय की आवश्यकता बन गई है। परमाणु ऊर्जा सही पर्याय साबित हो रहा है। विशेष बात यह भी है कि जो देश परमाणु ऊर्जा के विरोधी थे, आज वही देश इसके प्रति आकर्षित हो रहे हैं। भारत में वर्तमान स्थिति में 22 परमाणु रिएक्टर हैं और 29 प्रस्तावित हैं। उक्त वक्तव्य परमाणु ऊर्जा आयोग के सचिव अरुण श्रीवास्तव ने दिया। वह शनिवार 22 दिसंबर को पत्रकार क्लब ऑफ नागपुर के तत्वावधान में आयोजित मिट द प्रेस में बोल रहे थे। इस अवसर पर पत्रकार संघ के सचिव शिरीश बोरकर उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि परमाणु ऊर्जा आयोजन देश में परमाणु ऊर्जा प्रकल्पों के लिए नीति तैयार करता है।

इस आयोजन में वर्तमान में 13 सदस्य काम कर रहे हैं, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव, विदेश सचिव के अलावा विशेषज्ञ शामिल हैं। विभाग में कुल 30 यूनिट हैं। उन्होंने बताया कि हिरोशिमा, नागासाकी जैसी घटना के बाद जापान ने परमाणु ऊर्जा प्रकल्प की ओर ध्यान नहीं दिया था, लेकिन आज दोनों ही देश परमाणु ऊर्जा के महत्व को समझ चुके हैं। परमाणु ऊर्जा प्रकल्प को सुरक्षित रखने के लिए पानी की अधिक जरूरत पड़ती है, इस वजह से इन प्रकल्पों को समुद्र के मुहाने पर बनाया जाता है।

देश के परमाणु रिएक्टर में उत्कृष्ट काम हो रहा है यही वजह है कि वर्तमान में देश में 6680 मेगावॉट ऊर्जा का निर्माण किया जाता है। परमाणु ऊर्जा प्रकल्प के बारे में लोगों के मन के डर को दूर करने के लिए विभिन्न प्रकार के जनजागृति का आयोजन किया जाता है। हर साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देश परमाणु रिएक्टर का अभ्यास करते हैं। भारत-यूएस के बीच परमाणु करार होने से भारत की परमाणु ऊर्जा मुहिम को बल मिलता है। परमाणु ऊर्जा प्रकल्प की सुरक्षा के लिए खर्ज होने से प्रकल्प पर भी अधिक खर्च होता है। देश में यूरेनियम का भंडारण कम है, जबकि थोरियम का भंडारण अधिक है। 

अगले साल सालों में परमाणु ऊर्जा के लिए थोरियम का उपयोग नहीं किया गया फिर भी कोई परेशानी नहीं है क्योंकि यूरेनियम के अलावा कई सारे स्त्रोत वर्तमान में उपलब्ध हैं। दुनिया में प्रति व्यक्ति करीब 4 से 5 हजार किलोवाॅट ऊर्जा का उपयोग होता है, लेकिन भारत में अब भी प्रति व्यक्ति 1 हजार किलोवॉट ऊर्जा का ही उपयोग किया जाता है। ऊर्जा उपयोग करने के मामले में दुनिया की तुलना में आज हमारा देश पीछे है। परमाणु ऊर्जा प्रकल्प से निकलने वाले अनउपयोगी रसायन की फिर से प्रक्रिया कर उसका उपयोग ईंधन में किया जाता है।
 

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