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लोकपाल और टीपीए की भी नहीं सुन रहीं बीमा कंपनियाँ - मनमानी से परेशान हो रहे बीमा धारक, कहीं भी नहीं मिल रही राहत

लोकपाल और टीपीए की भी नहीं सुन रहीं बीमा कंपनियाँ - मनमानी से परेशान हो रहे बीमा धारक, कहीं भी नहीं मिल रही राहत

डिजिटल डेस्क जबलपुर । प्रीमियम के रूप में जनता की गाढ़ी कमाई वसूलने वाली बीमा कंपनियाँ इतनी बेखौफ हो गई हैं कि वे अब लोकपाल और थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) की भी नहीं सुन रही हैं। लोकपाल की ओर से जारी किए जाने वाले आदेशों की भी बीमा कंपनियाँ परवाह नहीं कर रही हैं। कोरोना काल में हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि बीमा धारकों की कोई सुनने वाला ही नहीं है। सरकार ने बीमा कंपनियों को हेल्थ इंश्योरेंस के लिए लाइसेंस तो जारी कर दिया है, लेकिन बीमा क्लेम सुनिश्चित करने की पुख्ता व्यवस्था नहीं बनाई है। इसका फायदा बीमा कंपनियाँ उठा रही हैं। 
बीमा कंपनियाँ हेल्थ इंश्योरेंस कराने वालों को अपने एजेन्टों के जरिए बताती हैं कि उनकी कंपनी की क्लेम की प्रक्रिया बिल्कुल आसान है। क्लेम प्रस्तुत करने के कुछ ही घंटों में क्लेम स्वीकृत कर दिया जाएगा। आईआरडीएआई के नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति क्लेम प्रस्तुत करता है और टीपीए द्वारा क्लेम का सत्यापन कर दिया जाता है तो उसका भुगतान कर दिया जाए। कंपनी के दावे उस समय खोखले साबित होते हैं, जब टीपीए द्वारा सत्यापित करने के बाद भी क्लेम का भुगतान नहीं किया जाता। बीमा धारक को कई बार कंपनी के दफ्तर के चक्कर  लगाने पड़ते हैं। 
अधिवक्ता मनीष मिश्रा का कहना है कि सरकार ने बीमा क्षेत्र में लोकपाल की व्यवस्था इसलिए की थी कि बीमा कंपनियों पर अंकुश लग सके। बीमा कंपनियाँ जब क्लेम देने से इनकार करें, तो बीमा धारक लोकपाल की शरण लेकर न्याय पा सके। बीमा लोकपाल द्वारा कंपनी और बीमा धारक का पक्ष सुनकर आदेश पारित किया जाता है। इसके बाद भी बीमा कंपनियाँ लोकपाल के आदेश का पालन नहीं करती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि लोकपाल के आदेश का पालन नहीं करने पर किसी भी प्रकार की दंड की व्यवस्था नहीं है। यही वजह है कि बीमा कंपनियों को लोकपाल का खौफ नहीं है। कई संगठनों ने लोकपाल को मजबूत करने की माँग करनी शुरू कर दी है। 
30 दिन में परिपालन रिपोर्ट अपलोड करने का प्रावधान 
बीमा लोकपाल के आदेश की परिपालन रिपोर्ट 30 दिन में वेबसाइट पर अपलोड करने का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक सर्वे से पता चला है कि  ज्यादातर कंपनियाँ लोकपाल के आदेश के परिपालन की रिपोर्ट अपलोड नहीं कर रही हैं। इससे पता ही नहीं चल पा रहा है कि कंपनियों ने लोकपाल के आदेशों का पालन किया या नहीं। वहीं दूसरी तरफ ज्यादातर बीमा धारक भी आदेश का पालन नहीं होने पर शिकायत नहीं दर्ज कराते हैं। इसका फायदा बीमा कंपनियाँ उठा रही हैं।
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।