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लोकवाणी : (आपकी बात - मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के साथ) प्रसारण तिथि - रायपुर, 11 अक्टूबर, 2020

October 12th, 2020 15:50 IST
लोकवाणी : (आपकी बात - मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के साथ) प्रसारण तिथि - रायपुर, 11 अक्टूबर, 2020

डिजिटल डेस्क, रायपुर। विषय -’नवा छत्तीसगढ़, हमर विकास मोर कहानी’ एंकर - सभी श्रोताओं को नमस्कार, जय जोहार। - लोकवाणी की ग्यारहवीं कड़ी के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी आकाशवाणी के रायपुर स्टूडियो पधार चुके हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी, आपका हार्दिक स्वागत है। - इस बार का विषय है ‘‘नवा छत्तीसगढ़: हमर विकास- मोर कहानी’’। इस साल 1 नवम्बर, 2020 को छत्तीसगढ़ राज्य के गठन को 20 वर्ष, पूरा होगा और आपकी सरकार को भी काम करते हुए 2 साल पूरे होने वाले हैं। ऐसे समय में इस लोकवाणी कार्यक्रम का विशेष महत्व है। माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब - आप मन ल धन्यवाद। अउ जम्मो सुनइया दाई-दीदी, सियान- जवान अउ लइका मन ला जय जोहार, नमस्कार। - ये दारी लोकवाणी के विषय तो अइसन हावय के आप मन ल सुनाना है अउ मोला बइठ के सुनना हे। फेर ये गोठ जरूर कहे बर चाहथंव के हमर राज्य के जनता, हमर श्रोता मन अब्बड़ समझदार हे। ओखर जुझारूपन, लगन अउ मेहनत के कारण छत्तीसगढ़ राज्य अपन जगह बनाए म सफल होय हे। मुख्यमंत्री के रूप मं मोर पौने दू बछर के अनुभव ह एही हावय, के आप मन के भागीदारी बिना कोनो सार्थक बुता नई हो सकय। एंकर - माननीय मुख्यमंत्री जी, आपने नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने का आह्वान किया। ऐसी-ऐसी जनहितकारी योजनाएं बनाईं, और लागू कीं जिसके कारण प्रदेश के विकास की दिशा और उसमें जनता की भागीदारी से सफलता की अनेक कहानियां रची गई हैं। आइये शुरू करते हैं, ‘जनता की कहानी उनकी जुबानी’, और फिर आपके विचार इसमें शामिल होंगे तो सोने में सुहागा हो जाएगा। - मैं दक्षश्री साहू, रायपुर से। लोकवाणी कार्यक्रम म मोर प्रदेश के मुखिया श्री भूपेश बघेल जी ल जोहार करत हंव। सिरतोन म मुखिया जी, अब छत्तीसगढ़ ल छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री मिले हवय। जेन ‘नवा छत्तीसगढ़’ गढ़त हवय। हमर नंदावत तीज- तिहार, खान-पान अउ लोक-संस्कृति ल फेर नवा पहचान मिलत हवय। ‘नवा छत्तीसगढ़’ गढ़े के संग म जुन्ना छत्तीसगढ़ के दिन मन ह फेर सुरता आवत हे। हां अब लगत हे के छत्तीसगढ़ ह छत्तीसगढ़िया मन बर बने हवय। ‘नवा छत्तीसगढ़’ के छत्तीसगढ़िया सरकार के जम्मो योजना मन नीक लगत हे, जेन ह वाकई म छत्तीसगढ़िया हितैषी योजना आय। ’नरवा-गरवा-घुरवा-बारी’ ले, लेके सरकार के जम्मो ’न्याय योजना‘ मन किसान, मजदूर अउ गरीब मन ल न्याय देवाय के योजना आय। मुख्यमंत्री जी ल मोर छोटे से आग्रह रिहिस के लोक-संस्कृति, खान-पान, तीज-तिहार के संगे संग हम छत्तीसगढ़िया मन के चिन्हारी ‘छत्तीसगढ़ी भाखा’ ल घलो उचित न्याय देवावव। माननीय मुख्यमंत्री जी का जवाब - बने कहेस दक्षश्री, नवा छत्तीसगढ़ गढ़े के मतलब हमर नंदावत संस्कृति ल, बोली-भाखा ल, खान-पान ल, मूल्य अउ संस्कार ल बचाना भी हे, अउ विकास के नवा रद्दा बनाना भी हे। - ‘नरवा-गरवा-घुरवा-बारी’ अउ ‘न्याय योजना’ मन ल मिला के देखबो त सफ्फा नज़र आही, के जहां ले एक बात खतम होथे उहीं ल दूसरइया बात सुरू हो जाथे। हमर प्रयास हावय, के सरलगहा योजना बनय, ते पाय के एक के फायदा दूसर बर मिलय। जइसे गरवा, गोठान अउ गोधन न्याय योजना। फेर वर्मीकम्पोस्ट ले धान-पान ल फायदा होही अउ बारी म घलोक लाभ मिलही। - नरवा के विकास होही त ओखर लाभ जम्मो कोती मिलही। - जहां तक छत्तीसगढ़ी के बात हरय, त हम मन जतका ऐखर सेवा करबो, जतका उपयोग करबो, जतका प्रचार करबो, वइसने संस्कृति अउ भाखा बाढ़त जाही। भाखा के विकास हमर हाथ मं हे। बाजारवाद के जमाना हे, जम्मो मन छत्तीसगढ़ी म गोठियाबो त पूरा बाजार अउ कम्पनी मन उही भाखा बोलही। - हां पाछू 15 बछर म बात आगू नइ बढ़ पाए, त ओ कमी ल हम मन पूरा करत हन। छत्तीसगढ़ी ल आठवीं अनुसूची मं शामिल कराए बर विधानसभा ले संकल्प पारित करा के, केन्द्र सरकार करा भेजे गे हे। हमर ताकत के उपयोग ले छत्तीसगढ़ी भाखा ल सिरमौर बना सकत हन। इही अपील आप सब मन ल करथंव। एंकर - माननीय मुख्यमंत्री जी, आपकी योजनाओं से किसान परिवारों में बहुत खुशी का माहौल है। सबसे ज्यादा कहानियां तो किसानों की हैं जो यह बताती हैं कि उन्होंने जितना सोचा भी नहीं था वो उन्हें पौने दो साल में मिल गया है। सुनते हैं कुछ कहानियां- - मैं पुरैन चन्द्राकर, चन्दखुरी, जिला-दुर्ग, निवासी। संयुक्त परिवार में 11 एकड़ खेती की जमीन है, जिसमें मेरा 1 लाख 5 हजार रूपए का कर्ज माफ हुआ। करीब 160 क्ंिवटल धान विक्रय किया हूँ, जिसमें साढ़े तीन लाख के आस-पास अपने धान का हुआ। उस पैसे से मेरी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, भूमि सुधार किया, खेतों की फिनिशिंग की और जमीन भी लिया हूं, दो गाय भी लिया हूं, एक माह में 30 हजार रुपए का गोबर भी बेचा हूं। - मेरा नाम जीवन प्रताप सिंह ग्राम लेपरा, दुर्ग का हूँ। वर्तमान में ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ के तहत मुझे 15 हजार रुपए मिले हैं,

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