दैनिक भास्कर हिंदी: वित्त आयोग ने कहा- महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति दूसरे राज्यों से अच्छी

September 20th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। भारत सरकार के पंद्रहवे वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह ने महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति को खराब बताने वाली खबरों को भ्रामक बताया है। बुधवार को सरकारी अतिथि गृह सहयाद्री में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति देश से अच्छी है। उन्होंने कहा कि यह सच है कि महाराष्ट्र का पूंजीगत व्यय कम है, पर इसमें बढ़ोतरी की पूरी संभावनाएं हैं। इस दौरान आयोग के सदस्य शक्तीकांता दास, डॉ. अनुप सिंह, डॉ. अशोक लाहिरी, डॉ. रमेश चंद, सचिव अरविंद मेहता भी मौजूद थे। केंद्र सरकार द्व्रारा गठित पंद्रहवा वित्त आयोग इन दिनों महाराष्ट्र के दौरे पर है। इसके पहले मंगलवार को आयोग ने विभिन्न राजनीतिक दलों, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों और उद्योग-व्यापार जगत के लोगों के साथ बैठक कर उनकी राय जानी।

बुधवार को राज्य के वित्त विभाग ने महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति और जरूरतों को लेकर आयोग के सामने प्रजेंटेशन दिया। इसके पहले आयोग के निष्कर्षों के आधार पर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला था। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य की आय घट रही है और इससे आर्थिक हालत खराब हो रही। सिंह ने कहा कि आयोग के निष्कर्षों के आधार पर महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति को लेकर जो बाते कही जा रही हैं, वह सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम आकड़ों को बनाने-बिगड़ने का काम नहीं करते पर इन आकड़ों का गलत विश्लेषण किया गया है। इसको लेकर भ्रामक खबरे प्रकाशित हुई हैं। सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र ट्रिलियन इकोनॉमी वाला राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से हमें महाराष्ट्र का क्षेत्रिय असंतुलन दूर करने के लिए प्रस्ताव सौपे गए हैं। इस कार्य के लिए निधि की जरूरत होगी। विदर्भ व मराठवाडा के लिए हमें प्रस्ताव मिले हैं। महाराष्ट्र में कम सिंचन क्षेत्र की बाबत सिंह ने कहा कि इस संबंध में जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है। संबंधित विभाग के सचिव से भी हमारी चर्चा हुई है।  

मुंबई पर खास ध्यान

वित्त आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि मुंबई भारतीय अर्थ व्यवस्था  का इंजन है। मुंबई पर जनसंख्या का काफी भार है। यहां इंफ्रास्टेक्चर के विकास के लिए कई प्रस्ताव हमें दिए गए हैं। एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि स्थलांतरण देशव्यापी समस्या है। इसके पहले हम केरल गए थे। वहां के लोग रोजी-रोटी के लिए विदेशों में चले गए हैं इस लिए वहां दूसरे राज्यों से आए लोग काम कर रहे हैं। यदि वहां दूसरे राज्यों के लोग न जाए तो कई काम रुक जाएंगे।